मेहनत और लगन से बनी कहानी अब लालच और भ्रष्टाचार की काली दास्तान में बदल चुकी है। आदर्श से भ्रष्टाचार की ओर।
@शब्द दूत ब्यूरो (13 सितंबर 2025)
संबलपुर। ओडिशा के संबलपुर जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बामड़ा के तहसीलदार अश्विनी कुमार पंडा, जिन्हें कभी युवाओं के लिए मेहनत और संघर्ष की प्रेरणा माना जाता था, अब भ्रष्टाचार के आरोप में रंगे हाथों पकड़े गए हैं।
शुक्रवार को विजिलेंस टीम ने उन्हें उनके ही ड्राइवर पी. प्रवीण कुमार के जरिए 15,000 रुपये की घूस लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोप है कि पंडा ने एक किसान से ज़मीन का म्यूटेशन कराने के बदले 20,000 रुपये की मांग की थी। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए विजिलेंस ने जाल बिछाया और तहसीलदार को पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस ने पंडा के घर की तलाशी ली। यहां से 4.73 लाख रुपये नकद मिले, जिनके स्रोत की जांच जारी है।सिर्फ 29 साल के अश्विनी पंडा की कहानी कभी मेहनती युवाओं के लिए आदर्श थी। जाजपुर जिले के खेतरपाल गांव के रहने वाले पंडा ने जनकल्याण हाई स्कूल से पढ़ाई की और रेवेंशा विश्वविद्यालय से साइंस में प्लस टू किया। 2015 में बीटेक करने के बाद वे दिल्ली में तीन साल प्राइवेट नौकरी में रहे।
2018 में ओडिशा लौटकर उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू की। असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (ASO) की परीक्षा में वे महज 0.5 अंक से चूके, लेकिन हार नहीं मानी। 2019 में ओडिशा सिविल सर्विसेस परीक्षा पास कर तहसीलदार बने और युवाओं के लिए उदाहरण बन गया था।लेकिन अब वही अफसर घूसखोरी में पकड़ा गया है। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों में आक्रोश है। लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर टॉपर और आइकॉन माने जाने वाले अफसर ही भ्रष्ट निकले, तो फिर आम लोग किससे ईमानदारी की उम्मीद करें?
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal

