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काशीपुर: क्यों नहीं बन पाता पर्वतीय समाज का जनप्रतिनिधि? शब्द दूत की खास रिपोर्ट -भाग -1

@शब्द दूत ब्यूरो (10 नवंबर 2023)

काशीपुर। नारायण दत्त तिवारी और के सी सिंह बाबा के अलावा यहां से कोई पर्वतीय मूल का जन प्रतिनिधि नहीं चुना जा सका। स्व एन डी तिवारी का व्यक्तित्व अपने आप में इतना ऊंचा था कि उन्हें केवल पर्वतीय समाज से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। ठीक यही बात के सी सिंह बाबा के बारे में कही जा सकती है। लेकिन अब काशीपुर से किसी पर्वतीय समाज के व्यक्ति का जन प्रतिनिधि चुना जाना लगभग नामुमकिन हो गया है। 

सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि स्व एन डी तिवारी और के सी सिंह बाबा उस दौर में जनप्रतिनिधि चुने गए जब काशीपुर नगर निगम क्षेत्र और विधानसभा क्षेत्र में पर्वतीय समाज की संख्या कम हुआ करती थी। जैसे जैसे पर्वतीय समाज के मतदाताओं की संख्या बढ़ी उसके विपरीत पर्वतीय समाज के व्यक्ति का जनप्रतिनिधि चुने जाने की संभावनाएं क्षीण होती गई। और आज पर्वतीय समाज में नेताओं की संख्या भी बढ़ गई। शायद यही कारण है कि हर व्यक्ति खुद को जनप्रतिनिधि के योग्य समझने लगा। वही दूसरी ओर राष्ट्रीय दलों ने पर्वतीय समाज को बांटने की नीति अपनाकर रही सही संभावनाएं भी लगभग समाप्त कर दी। 

आपको बता दें कि मनोज जोशी एडवोकेट,एन सी सिंह बाबा, जैसे दिग्गजों को यहां के पर्वतीय समाज ने जन-प्रतिनिधि चुने जाने को नकार दिया। यहां यह कहना उचित होगा कि भारतीय जनता पार्टी ने भी टिकट वितरण के दौरान पर्वतीय समाज के किसी व्यक्ति को टिकट देने से गुरेज किया। हालांकि इस मामले में कांग्रेस का पर्वतीय समाज के लिए टिकट वितरण में सकारात्मक नजरिया रहा। 

वहीं अगर बात करें नगर निगम पार्षदों की तो जरूर पर्वतीय समाज के लोगों ने इसमें सफलता हासिल की। लेकिन ये सफलता किसी दल से ज्यादा उनकी अपनी व्यक्तिगत जीत मानी जाती है। 

आगामी कुछ माह बाद नगर निगम के चुनाव होने  हैं।  अब पर्वतीय समाज की ओर से मेयर के रूप में अपने प्रत्याशी को उतारने की बात की जा रही है। पर क्या कोई दल पर्वतीय समाज के लगभग तीस हजार पर्वतीय  मतदाताओं की भारी भरकम संख्या को देखते हुए किसी पर्वतीय समाज के व्यक्ति को मैदान में उतारेगा? यहां शब्द दूत ने जब कुछ लोगों से बातचीत की तो उनका कहना था कि कम से कम मौजूदा सत्तारूढ़ पार्टी से तो ये उम्मीद कम ही है क्योंकि उसे लगता है जब अधिकांश पर्वतीय मतदाता यूं ही उसके पक्ष में हैं तो किसी को भी टिकट मिले उसे जीतना ही है। विधानसभा सभा चुनाव में जो नतीजा आया उससे तो यही लगता है।

वहीं कांग्रेस टिकट देने के मामले में अधिकांशतः पर्वतीय समाज को महत्व देती आई है पर तीस हजार मतदाताओं ने उसे नकारना जारी रखा।

बहरहाल शब्द दूत की यह श्रृंखला अभी जारी है। अगली रिपोर्ट में बतायेंगे कि पर्वतीय समाज आगामी मेयर के पद पर किन चेहरों को  पसंद कर रहे हैं और कौन है वो चेहरा जिसे सर्वाधिक लोग पसन्द करते हैं?

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