भारतीय टेलीविजन इतिहास का सबसे पहला सुपरहिट सीरियल हम लोग को जो प्रसिद्धि मिली वह शायद ही किसी से और सीरियल ने पाई हो। एक आम मध्य वर्गीय भारतीय परिवार पर आधारित यह सीरियल देखते समय लगता था कि हम उस परिवार का हिस्सा हैं और जो कुछ घटित हो रहा है वह हमारे परिवार में ही हो रहा है।
इस सीरियल के लेखक उत्तराखंड के मनोहर श्याम जोशी के लेखन ने इस सीरियल को उत्कृष्ट नाटकों की श्रेणी में ला खड़ा किया। मनोहर श्याम जोशी के कुशल लेखन का ही कमाल था कि इस परिवारिक नाटक के निभाये किरदार जैसे उस वक़्त के हर दूसरे घर के किरदार थे।दादा, दाद, मां-बाप, चाचा, बुआ आदि रिश्तों को ऐसे देखते थे जैसे वो उनके घर के किरदार हों।
दादी हों या बसेसर राम भागवंती लल्लू बड़की मंझली छुटकी नन्हे ये सब हमारे आसपास ही घूमते या पड़ोस में रहने वालों से मिलते जुलते किरदार होते थे।

सीरियल के हर एपीसोड के अंत में मशहूर अभिनेता अशोक कुमार जिस तरह से अगले दिन के एपीसोड के बारे में सस्पेंस रखते हुये विवरण देते थे उससे दर्शक आने वाले एपीसोड की बेसब्री से प्रतीक्षा करता था। इस सीरियल की सबसे खास बात यह थी कि हर उम्र का दर्शक स्त्री पुरुष, सास बहू बेटा भाई बहन दादी शायद ही परिवार में हर कोई होगा जो इस सीरियल को नहीं देखता होगा। कारण यह कि वह उस सीरियल में खुद को अभिनय करते हुए महसूस करता था। 
7 जुलाई 1984 को शुरू हुआ यह सीरियल 17 दिसंबर 1985 तक दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ था। इसके कुल 154 एपीसोड प्रसारित हुये थे।
हम लोग का विचार तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री वसंत साठे को उनकी 1982 की मेक्सिको यात्रा के बाद आया। हम लोग की योजना का विकास लेखक मनोहर श्याम जोशी जिन्होनें इस धारावाहिक की पटकथा लिखी व पी. कुमार वासुदेव, एक फ़िल्मकार जिन्होनें इसका निर्देशन किया, की सहायता से किया गया।

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