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टावर तोड़ने के मामले में रिलायंस पहुंची हाईकोर्ट, कहा-कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए कभी नहीं ली किसानों की जमीन

@शब्द दूत ब्यूरो

नई दिल्ली। केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन उग्र रूप धारण कर चुका है। हाल के दिनों में पंजाब और हरियाणा में प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा रिलायंस जियो के टावरों को नुकसान पहुंचाने और तोड़फोड़ करने की खबरें आई थीं। टावरों में तोडफोड़ के मामले में अब रिलायंस ने हाईकोर्ट का रुख किया है।

रिलायंस कंपनी ने अपनी संपत्ति और सुविधाओं की रक्षा के लिए सरकारी हस्तक्षेप की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा कि वह न तो किसानों से खाद्यान्नों की सीधी खरीद करती है और न ही वह अनुबंध पर खेती के व्यवसाय में है।

इन दोनों राज्यों में कई किसानों ने कृषि कानून के खिलाफ अपना गुस्सा कथित तौर पर रिलायंस जियो के टावरों पर निकाला था। प्रदर्शनकारी किसानों ने टावरों की बिजली बंद कर दी थी और केबल काटने के साथ जियो टावर के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया था। प्रदर्शनकारी किसान रिलायंस इंडस्ट्रीज को नये कृषि कानूनों का लाभार्थी मान उसका विरोध कर रहे हैं। कृषि कानून के खिलाफ एक महीने से ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे किसानों को डर है कि ये कानून उनके लिए लंबी अवधि के लिए हानिकारक होगा।

कंपनी ने कहा, “देश में अभी जिन तीन कृषि कानूनों को लेकर बहस चल रही है, उनके साथ कंपनी का कोई लेना-देना नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसे इन कानूनों से किसी तरह का कोई फायदा नहीं हो रहा है। रिलायंस का नाम इन तीन कानूनों के साथ जोड़ना सिर्फ और सिर्फ हमारे कारोबार को नुकसान पहुंचाने और हमें बदनाम करने का कुप्रयास है।”

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