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गायक दलेर मेंहदी के समर्थन में उतरी फिल्म इंडस्ट्री, उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के व्यवहार पर उठे सवाल; उत्तराखंड की सांस्कृतिक छवि पर भी बहस

@विनोद भगत

उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और मशहूर पंजाबी गायक दलेर मेंहदी के बीच टिहरी जिले में आयोजित मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले के दौरान हुआ विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। मंच पर दलेर मेंहदी की प्रस्तुति के बीच मंत्री द्वारा हस्तक्षेप करने और उन पर शराब के नशे में कार्यक्रम करने का आरोप लगाने के बाद मनोरंजन जगत की कई प्रमुख हस्तियां गायक के समर्थन में सामने आई हैं। मीका सिंह, बादशाह, कपिल शर्मा और गायिका हर्षदीप कौर सहित कलाकारों ने दलेर मेंहदी के साथ हुए व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। इस घटनाक्रम ने कलाकारों के सम्मान, सार्वजनिक मंच पर जनप्रतिनिधियों के आचरण और सांस्कृतिक आयोजनों की गरिमा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

घटना रविवार, 18 अक्टूबर की रात टिहरी जिले के नरेंद्रनगर क्षेत्र में आयोजित सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले की सांस्कृतिक संध्या के दौरान हुई। नवरात्र से जुड़े इस आयोजन में दलेर मेंहदी की प्रस्तुति देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। कार्यक्रम के दौरान उनकी गायकी और आवाज के तालमेल को लेकर दर्शकों में असंतोष की स्थिति बनी। इसी बीच कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और उन्होंने गायक की प्रस्तुति पर नाराजगी जताते हुए कार्यक्रम रोकने को कहा।

वायरल वीडियो में मंत्री को दलेर मेंहदी से यह कहते सुना जा सकता है कि जब वह ठीक से बोल नहीं पा रहे हैं तो गाना कैसे गाएंगे। उन्होंने गायक पर नशे की हालत में कार्यक्रम करने का आरोप लगाया और धार्मिक आयोजन की मर्यादा का हवाला देते हुए आपत्ति जताई। वीडियो में दलेर मेंहदी मंत्री के सामने हाथ जोड़कर अपनी बात रखने का प्रयास करते भी दिखाई देते हैं। इस घटनाक्रम के सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

हालांकि मंत्री के आरोपों और कलाकारों की प्रतिक्रिया के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। दलेर मेंहदी के नशे में होने की बात मंत्री का आरोप है। उपलब्ध समाचारों में इसकी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस आरोप को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। दूसरी ओर, मंच पर हुई बहस और मंत्री द्वारा प्रस्तुति के बीच हस्तक्षेप किए जाने का वीडियो इस विवाद का प्रमुख आधार बना है।

मीका सिंह ने किया भाई का बचाव

दलेर मेंहदी के समर्थन में सबसे मुखर आवाज उनके भाई और गायक मीका सिंह की रही। मीका ने सार्वजनिक रूप से दलेर के पेशेवर आचरण का बचाव करते हुए शराब के सेवन से जुड़े आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दलेर मेंहदी लंबे समय से संगीत जगत में सक्रिय हैं और उनके व्यक्तित्व तथा काम को देखते हुए इस तरह के आरोप लगाने से पहले तथ्यों को समझना चाहिए।

मीका सिंह ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि एक वरिष्ठ कलाकार को हजारों लोगों के सामने इस तरह फटकारा गया। उनके रुख से यह संदेश सामने आया कि किसी कलाकार की प्रस्तुति अपेक्षा के अनुरूप न होने पर आयोजक सवाल जरूर उठा सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक अपमान और बिना पुष्टि के गंभीर आरोप लगाने से बचना चाहिए।

मीका की प्रतिक्रिया ने विवाद को केवल उत्तराखंड के एक मेले तक सीमित नहीं रहने दिया। मामला अब कलाकारों के पेशेवर सम्मान और कार्यक्रम आयोजकों तथा कलाकारों के बीच जवाबदेही के सवाल से जुड़ गया है।

बादशाह, कपिल शर्मा और हर्षदीप कौर भी समर्थन में

मशहूर रैपर बादशाह और अभिनेता-कॉमेडियन कपिल शर्मा ने भी दलेर मेंहदी के समर्थन में प्रतिक्रिया दी। गायिका हर्षदीप कौर ने भी कलाकार के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया। इन प्रतिक्रियाओं में यह बात प्रमुख रही कि किसी कलाकार की सार्वजनिक आलोचना करने से पहले उसकी परिस्थितियों और स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को भी समझना चाहिए।

कपिल शर्मा ने दलेर मेंहदी के स्वास्थ्य का उल्लेख करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। मनोरंजन जगत से जुड़ी प्रतिक्रियाओं में यह बात भी सामने आई कि दलेर मेंहदी की हाल में सर्जरी हुई थी और वह स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से उबर रहे थे। कलाकारों ने इस पृष्ठभूमि में उनकी प्रस्तुति को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने पर आपत्ति जताई।

इन प्रतिक्रियाओं का मूल सवाल यह है कि क्या किसी कलाकार की मंच पर कमजोर प्रस्तुति को सीधे नशे से जोड़ देना उचित है, जबकि उसके स्वास्थ्य या अन्य संभावित कारणों की जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट न हो। कलाकारों का समर्थन इस बात को रेखांकित करता है कि आरोप और प्रमाण के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।

मंत्री सुबोध उनियाल ने भी रखा अपना पक्ष

विवाद बढ़ने के बाद सुबोध उनियाल ने अपने रुख का बचाव किया। उनका कहना रहा कि कार्यक्रम में कलाकार को प्रस्तुति देने के लिए भुगतान किया गया था और यदि वह अस्वस्थ महसूस कर रहे थे तो उन्हें कार्यक्रम में नहीं आना चाहिए था। मंत्री ने दर्शकों की अपेक्षाओं और आयोजन की गरिमा का हवाला देते हुए मंच पर हस्तक्षेप करने के अपने फैसले को उचित ठहराया।

यह पक्ष भी बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सार्वजनिक धन या आयोजन के बजट से भुगतान होने पर दर्शकों को अच्छी प्रस्तुति की अपेक्षा रहती है। आयोजकों की जिम्मेदारी है कि वे कार्यक्रम की गुणवत्ता सुनिश्चित करें और यदि किसी प्रकार की समस्या आती है तो उसका समाधान निकालें। लेकिन सवाल यह है कि इस जिम्मेदारी का निर्वहन किस तरीके से किया जाना चाहिए।

यदि किसी कलाकार की प्रस्तुति में समस्या दिखाई देती है, तो आयोजक या कार्यक्रम प्रबंधन मंच के पीछे बातचीत कर सकते हैं, प्रस्तुति में विराम लेकर स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं अथवा अनुबंध की शर्तों के अनुसार आगे का निर्णय ले सकते हैं। गंभीर आरोपों को सार्वजनिक रूप से लगाने से पहले तथ्यों की जांच करना और कलाकार को अपना पक्ष रखने का अवसर देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

धार्मिक आयोजन की मर्यादा बनाम कलाकार का सम्मान

इस पूरे विवाद में धार्मिक आयोजन की मर्यादा और कलाकार के सम्मान को आमने-सामने रखकर देखने की कोशिश की जा रही है। मंत्री की आपत्ति का आधार यह था कि कार्यक्रम नवरात्र और मां कुंजापुरी से जुड़े मेले का हिस्सा था, इसलिए मंच पर अनुशासन और मर्यादा का पालन होना चाहिए। इस तर्क को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में प्रस्तुति देने वाले कलाकारों से भी आयोजनों की प्रकृति के अनुरूप व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।

लेकिन धार्मिक मर्यादा बनाए रखने का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के बारे में अपुष्ट आरोपों को सार्वजनिक रूप से तथ्य की तरह रखा जाए। किसी कलाकार की प्रस्तुति खराब होना, आवाज का साथ न देना, स्वास्थ्य संबंधी समस्या होना और नशे में होना अलग-अलग स्थितियां हैं। इनके बीच अंतर किए बिना निष्कर्ष निकालना विवाद को और बढ़ा सकता है।

एक जिम्मेदार सार्वजनिक प्रतिनिधि से अपेक्षा की जाती है कि वह किसी समस्या पर स्पष्ट रुख अपनाए, लेकिन उसकी भाषा और तरीका भी गरिमापूर्ण हो। इसी तरह कलाकारों और आयोजकों को भी अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर रहना चाहिए। दोनों पक्षों की जवाबदेही के बीच संतुलन ही किसी सार्वजनिक आयोजन की प्रतिष्ठा को मजबूत कर सकता है।

उत्तराखंड की छवि पर क्यों उठ रहे सवाल?

उत्तराखंड की पहचान धार्मिक पर्यटन, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत के साथ जुड़ी हुई है। कुंजापुरी मेला जैसे आयोजन स्थानीय संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों में देश के प्रसिद्ध कलाकारों को आमंत्रित करने का उद्देश्य स्थानीय लोगों को मनोरंजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्र की पहचान को व्यापक स्तर पर स्थापित करना भी होता है।

जब किसी बड़े आयोजन का वीडियो विवाद के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आता है, तो उसका असर आयोजन की छवि से आगे बढ़कर राज्य की सार्वजनिक छवि तक पहुंच सकता है। इस मामले में भी चर्चा कलाकार की प्रस्तुति से शुरू हुई, लेकिन अब बहस मंत्री के व्यवहार, सार्वजनिक मंच पर भाषा के इस्तेमाल और कलाकारों के सम्मान तक पहुंच गई है।

राज्य सरकार और आयोजकों के लिए यह घटना एक सीख हो सकती है कि बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार किए जाएं। कलाकार की स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, मंच पर तकनीकी व्यवस्था, प्रस्तुति की शर्तें और किसी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने की प्रक्रिया पहले से निर्धारित होनी चाहिए। इससे भविष्य में विवाद की संभावना कम की जा सकती है।

असली सवाल व्यवहार और जवाबदेही का

दलेर मेंहदी प्रकरण में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले पूरे घटनाक्रम, संबंधित पक्षों के बयानों और उपलब्ध प्रमाणों को देखना जरूरी है। मंत्री ने कलाकार की प्रस्तुति पर गंभीर आपत्ति जताई और नशे का आरोप लगाया। दूसरी ओर, मनोरंजन जगत के कई कलाकारों ने दलेर मेंहदी का समर्थन करते हुए उनके स्वास्थ्य और सार्वजनिक सम्मान का सवाल उठाया। दोनों पक्षों के बयानों के बीच तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।

इस विवाद का व्यापक संदेश यह है कि लोकप्रियता, राजनीतिक पद या सार्वजनिक मंच पर मौजूदगी किसी को भी जवाबदेही से मुक्त नहीं करती। कलाकार को अपनी प्रस्तुति और अनुबंध के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए, आयोजक को दर्शकों के हितों का ध्यान रखना चाहिए और जनप्रतिनिधि को अपनी आपत्ति दर्ज करते समय सार्वजनिक पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए।

सवाल केवल यह नहीं है कि दलेर मेंहदी उस रात अपेक्षा के अनुरूप गा पाए या नहीं। सवाल यह भी है कि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में असहमति और नाराजगी व्यक्त करने का उचित तरीका क्या होना चाहिए। यदि आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है, तो उन्हें तथ्य मानकर किसी की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है। वहीं, यदि प्रस्तुति में वास्तविक कमी थी, तो उसका समाधान भी पेशेवर और सम्मानजनक तरीके से निकाला जा सकता था।

फिलहाल इस घटनाक्रम ने उत्तराखंड के एक सांस्कृतिक मेले को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। मीका सिंह, बादशाह, कपिल शर्मा और हर्षदीप कौर जैसे कलाकारों का दलेर मेंहदी के समर्थन में सामने आना बताता है कि मनोरंजन जगत इस मामले को केवल गायकी की गुणवत्ता का विवाद नहीं, बल्कि कलाकार के साथ सार्वजनिक व्यवहार के सवाल के रूप में भी देख रहा है। अब जरूरी है कि आरोपों और प्रतिक्रियाओं से आगे बढ़कर तथ्य सामने आएं और यह सुनिश्चित हो कि भविष्य में सांस्कृतिक आयोजनों की गरिमा भी बनी रहे तथा कलाकारों के सम्मान की रक्षा भी हो।

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