@शब्द दूत ब्यूरो (17 अक्टूबर 2026)
काशीपुर। उत्तराखंड में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की कथित बिजली चोरी और विद्युत लाइन लॉस को लेकर ऊर्जा विभाग ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में शनिवार तड़के विद्युत विभाग की विजिलेंस टीम ने भारी पुलिस बल के साथ काशीपुर के ग्राम बरखेड़ा पांडे में छापेमारी की। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान मौके पर 100 से अधिक विद्युत कनेक्शन अवैध पाए गए। विभाग ने संबंधित उपभोक्ताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है और एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया की जा रही है।
प्रदेश में बिजली चोरी रोकने के लिए ऊर्जा विभाग को पुलिस बल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बाद कुमाऊं मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार छापेमारी की जा रही है। काशीपुर में हुई कार्रवाई को भी इसी अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। यूपीसीएल के कुमाऊं चीफ शेखर त्रिपाठी के अनुसार, हल्द्वानी, रामनगर और काशीपुर में कार्रवाई के दौरान बिजली चोरी के 250 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और विभाग का लक्ष्य विद्युत लाइन लॉस को कम करना है।
ऊर्जा विभाग के सामने बिजली चोरी और बिलों का भुगतान नहीं होने से होने वाला आर्थिक नुकसान बड़ी चुनौती बन गया है। उपलब्ध विभागीय आंकड़ों और उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ ऑर्डर के अनुसार, प्रदेश में कुछ शहरी क्षेत्रों में एटीएंडसी लॉस और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस काफी अधिक है। इन क्षेत्रों में बिजली चोरी के साथ तकनीकी नुकसान और बिलों की वसूली में कमी भी वजह हो सकती है।
आंकड़ों के मुताबिक, गदरपुर में 30.58 प्रतिशत, जसपुर में 27 प्रतिशत, खटीमा में 53 प्रतिशत, लक्सर में 27 प्रतिशत, लंढौरा में 69.40 प्रतिशत, मंगलौर में 47.62 प्रतिशत और सितारगंज में 27.25 प्रतिशत लाइन लॉस बताया गया है। इन आंकड़ों के आधार पर संबंधित क्षेत्रों में नुकसान कम करने के लिए विशेष निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत जताई जा रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के 122 शहरों में से आठ शहरों में 27 से 69 प्रतिशत तक एटीएंडसी लॉस दर्ज होने से ऊर्जा निगम की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ रहा है। इन आठ शहरों में जोशीमठ के अलावा हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जिले के कई शहर शामिल बताए गए हैं। हरिद्वार जिले के रुड़की सर्किल में भी बिजली का भारी नुकसान सामने आने की बात कही गई है।
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने अपने विस्तृत टैरिफ ऑर्डर में ऊर्जा निगम को विद्युत नुकसान कम करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए नियमित निगरानी, एनर्जी ऑडिट और संचालन एवं रखरखाव के साथ पूंजीगत मद में होने वाले खर्चों की समीक्षा पर जोर दिया गया है।
ऊर्जा निगम के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021-22 में कुल डिस्ट्रीब्यूशन लॉस 14.70 प्रतिशत था, जो 2022-23 में बढ़कर 16.39 प्रतिशत हो गया। वित्तीय वर्ष 2023-24 में यह घटकर 15.63 प्रतिशत दर्ज किया गया। बिजली चोरी और अन्य कारणों से होने वाले नुकसान के चलते निगम को हर साल भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है।
बिजली चोरी पर अंकुश लगाने के लिए ऊर्जा विभाग तकनीक का भी सहारा ले रहा है। ट्रांसफार्मरों पर ड्यूल मीटर लगाने और बिजली की खपत का मिलान करने के जरिए उन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, जहां विद्युत नुकसान अधिक है। इससे विभाग को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किन क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति और बिलिंग के आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर है।
विभागीय कार्रवाई के दौरान कर्मचारियों को सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए पुलिस बल की तैनाती भी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, बिजली चोरी के मामलों में कार्रवाई के दौरान विरोध और टीमों की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां सामने आती रही हैं। ऐसे में पुलिस के सहयोग से अभियान को प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बिजली चोरी रोकने को ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी बताते हुए कहा है कि इससे सरकार और आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ पड़ता है। उन्होंने नुकसान रोकने के लिए सख्ती और जरूरत पड़ने पर पुलिस बल के इस्तेमाल पर जोर दिया है।
बिजली चोरी और विद्युत लाइन लॉस का सीधा असर ऊर्जा निगम की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। इसका बोझ अंततः बिजली दरों और सरकारी वित्तीय संसाधनों के माध्यम से आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। ऐसे में काशीपुर के बरखेड़ा पांडे में हुई छापेमारी को प्रदेश में बिजली चोरी के खिलाफ चल रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि, छापेमारी में अवैध पाए गए कनेक्शनों की अंतिम संख्या और संबंधित मामलों में दोष की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
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