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सावधान :अस्पतालों और डॉक्टरों के विज्ञापनों पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की सख्ती, नैतिक दिशानिर्देश लागू

@शब्द दूत ब्यूरो (15 अक्टूबर 2026)

नई दिल्ली। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने अस्पतालों, चिकित्सा संस्थानों और पंजीकृत चिकित्सकों द्वारा किए जाने वाले विज्ञापनों एवं जनसंचार को लेकर नए नैतिक दिशानिर्देश जारी किए हैं। आयोग के एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड की ओर से 6 अक्टूबर 2026 को जारी सार्वजनिक नोटिस में सभी पंजीकृत चिकित्सकों और संबंधित पक्षों को इन दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग के अनुसार, ये दिशानिर्देश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने यह कदम चिकित्सा पेशे की गरिमा बनाए रखने, स्वास्थ्य सेवाओं के व्यावसायीकरण को रोकने और मरीजों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से उठाया है। दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि चिकित्सा सेवाओं से संबंधित प्रचार-प्रसार में भ्रामक दावों को रोकना और जनता तक सही, तथ्यपरक तथा प्रमाण-आधारित जानकारी पहुंचाना आवश्यक है।

आयोग के मुताबिक, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों के विज्ञापन ऐसे होने चाहिए, जो मरीजों को गुमराह न करें और चिकित्सा पेशे के निर्धारित मानकों के अनुरूप हों। स्वास्थ्य सेवाओं के प्रचार में पारदर्शिता बनाए रखने के साथ ही चिकित्सा को केवल व्यावसायिक लाभ का माध्यम बनाने वाली गतिविधियों को हतोत्साहित करने पर जोर दिया गया है।

जारी नोटिस में डिजिटल माध्यमों से होने वाले स्वास्थ्य सेवाओं के प्रचार-प्रसार को भी नैतिक दायरे में रखने की बात कही गई है। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अस्पतालों और चिकित्सकों की ओर से दी जाने वाली जानकारी विश्वसनीय, सूचनात्मक और नैतिक मानकों के अनुरूप हो।

दिशानिर्देशों में चिकित्सा की विभिन्न प्रणालियों के बीच नैतिक मानकों में समानता सुनिश्चित करने का लक्ष्य भी शामिल है। इसके साथ ही अस्पतालों के विज्ञापन संबंधी तौर-तरीकों को पंजीकृत चिकित्सकों पर लागू व्यावसायिक मानकों के अनुरूप रखने पर जोर दिया गया है।

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों, चिकित्सा शिक्षा निदेशकों, राज्य चिकित्सा परिषदों के रजिस्ट्रार तथा मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के प्रमुखों को भी नोटिस की प्रतियां भेजी हैं, ताकि संबंधित स्तरों पर दिशानिर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित किया जा सके।

आयोग की ओर से जारी यह पहल चिकित्सा क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने तथा मरीजों को भ्रामक चिकित्सा दावों से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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