@शब्द दूत ब्यूरो (24 जून 2026)
देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया है। इसके स्थान पर अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (यूएसएएमई) कार्य करेगा, जो राज्य के सभी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की मान्यता, निगरानी और संचालन संबंधी व्यवस्थाओं को नियंत्रित करेगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में “उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों संबंधी मान्यता नियमावली-2026” को मंजूरी दी गई। यह नियमावली उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम-2025 के तहत तैयार की गई है।
नई व्यवस्था के तहत राज्य के 452 पंजीकृत मदरसों को अब दो चरणों की प्रक्रिया से गुजरना होगा। पहले उन्हें उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से विधिवत संबद्धता प्राप्त करनी होगी और उसके बाद उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण से नई नियमावली के अनुसार मान्यता लेनी होगी। सरकार का कहना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे में केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं बल्कि ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के शैक्षणिक संस्थान भी शामिल होंगे। सभी संस्थानों को निर्धारित सरकारी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा तथा आवश्यक दस्तावेज और शुल्क जमा करने होंगे।
नई नियमावली के अनुसार किसी भी संस्थान को मिलने वाली मान्यता तीन शैक्षणिक वर्षों तक वैध रहेगी। नवीनीकरण के लिए अवधि समाप्त होने से कम से कम तीन माह पहले आवेदन करना अनिवार्य होगा। मान्यता प्रदान करने से पहले संस्थान की अल्पसंख्यक पहचान, भूमि स्वामित्व, वित्तीय स्थिति, शिक्षकों की योग्यता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रतिबद्धता की जांच की जाएगी।
प्राधिकरण को आवश्यकता पड़ने पर संस्थानों का भौतिक निरीक्षण करने तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सुनवाई के बाद मान्यता निरस्त करने का अधिकार भी होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक के शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड के स्थान पर नई व्यवस्था लागू होने से शिक्षा संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ेगी तथा आधुनिक और समावेशी शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
समाज कल्याण एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने इसे ऐतिहासिक सुधार बताते हुए कहा कि नई व्यवस्था से अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को कानूनी संरक्षण मिलने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता और सामाजिक सौहार्द को भी बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड को समाप्त किए जाने का निर्णय लिया गया है, लेकिन पंजीकृत मदरसों को तत्काल बंद करने के बजाय उन्हें नई मान्यता और संबद्धता व्यवस्था के तहत संचालित किया जाएगा। राज्य सरकार का उद्देश्य इन संस्थानों को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए आधुनिक शिक्षा के मानकों के अनुरूप विकसित करना है।
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