@शब्द दूत ब्यूरो (19 जून 2026)
काशीपुर। आज के दौर में जहां लोग अपने व्यस्त जीवन में पशु-पक्षियों की ओर ध्यान देने के लिए भी समय नहीं निकाल पाते, वहीं काशीपुर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण त्रिवेदी ने संवेदनशीलता और पशु-प्रेम की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी क्षेत्रभर में सराहना हो रही है।
करीब 40 दिन पहले एक बछड़े का जन्म हुआ, लेकिन दुर्भाग्यवश जन्म के तुरंत बाद उसकी माँ की मृत्यु हो गई। माँ का साया सिर से उठ जाने के कारण नवजात बछड़े के सामने जीवन का संकट खड़ा हो गया। ऐसे समय में पंडित अरुण त्रिवेदी ने उसकी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।
बताया जाता है कि पं. त्रिवेदी पिछले 40 दिनों से नियमित रूप से सुबह और शाम स्वयं इस बछड़े को बोतल से दूध पिला रहे हैं। उनकी देखभाल, स्नेह और समर्पण का ही परिणाम है कि यह बछड़ा अब काफी हद तक स्वस्थ हो चुका है और तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पं. त्रिवेदी केवल ज्योतिष के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अपने मानवीय और करुणामय व्यवहार के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि पशु भी प्रेम, अपनापन और देखभाल के उतने ही हकदार हैं जितने मनुष्य।
बछड़े के प्रति उनके लगाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे अपने दैनिक कार्यों के बीच समय निकालकर उसकी देखभाल करते हैं। दूध पिलाने से लेकर उसकी सेहत पर नजर रखने तक, हर जिम्मेदारी वे स्वयं निभा रहे हैं।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि आज जब पशुओं के प्रति संवेदनशीलता कम होती जा रही है, ऐसे समय में पं. अरुण त्रिवेदी का यह कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका यह पशु-प्रेम न केवल मानवता का संदेश देता है, बल्कि यह भी सिखाता है कि निस्वार्थ सेवा और करुणा किसी भी जीव के जीवन में नई उम्मीद जगा सकती है।
पशुओं के प्रति उनकी यह सेवा भावना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे मानवता तथा जीव-दया का उत्कृष्ट उदाहरण मान रहे हैं।
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