@शब्द दूत ब्यूरो (02 जून 2026)
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने अवैध निर्माण और बिना वैधानिक अनुमति संचालित गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए डोईवाला तहसील के ग्राम कण्डोगल कुडियाल (थानों) स्थित एक मस्जिद एवं मदरसा भवन को सील कर दिया। यह कार्रवाई उत्तराखण्ड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम, 1973 के तहत की गई।
एमडीडीए के अनुसार संबंधित भवन के प्रथम एवं द्वितीय तल पर आवश्यक स्वीकृतियों के बिना मस्जिद का संचालन किया जा रहा था। जांच के दौरान परिसर में मदरसा संचालित होने की भी पुष्टि हुई, जबकि इसके लिए आवश्यक विभागीय अनुमतियां और पंजीकरण संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। प्राधिकरण का कहना है कि भवन के विरुद्ध पूर्व में भी चालान की कार्रवाई की जा चुकी थी और संबंधित पक्ष को कई अवसर प्रदान किए गए थे, लेकिन नियमों के अनुरूप अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए।
अधिकारियों के अनुसार भवन के प्रथम तल को 17 दिसंबर 2025 को सील किया गया था। इसके बाद जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने इमामों के आवास की व्यवस्था का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय की मांग की थी। प्राधिकरण ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सीमित अवधि की राहत प्रदान की और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। संबंधित पक्ष से उत्तराखण्ड वक्फ बोर्ड का अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी), उत्तराखण्ड मदरसा शिक्षा परिषद से पंजीकरण एवं मान्यता संबंधी अभिलेख सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे। मामले की सुनवाई के लिए 7 जनवरी 2026 और 11 फरवरी 2026 की तिथियां निर्धारित की गई थीं, लेकिन निर्धारित समयावधि में अपेक्षित अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए।
एमडीडीए के निरीक्षण के दौरान भवन परिसर में मदरसे का संचालन जारी पाया गया। अधिकारियों का कहना है कि लगातार नोटिस, सुनवाई और पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद नियमों का अनुपालन नहीं किया गया। आवश्यक अनुमतियों और अभिलेखों के अभाव में भवन का उपयोग जारी रहने को गंभीर उल्लंघन मानते हुए प्राधिकरण ने कार्रवाई का निर्णय लिया।
इसके बाद 1 जून 2026 को भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में संपूर्ण चालानशुदा अवैध निर्माण को सील कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान सहायक अभियंता प्रमोद मेहरा, अवर अभियंता दीपक नौटियाल, सुपरवाइजर, नायब तहसीलदार डोईवाला राजेन्द्र सिंह रावत, थानाध्यक्ष रानीपोखरी सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी।
एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या समुदाय विशेष को लक्षित करना नहीं, बल्कि कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्ष को नोटिस, सुनवाई और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि में वैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। ऐसे में अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करना आवश्यक हो गया।
एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि निरीक्षण के दौरान नियमों के उल्लंघन की स्थिति पाए जाने के बाद उत्तराखण्ड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम, 1973 के तहत भवन को सील किया गया। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में सभी निर्माण और गतिविधियों का संचालन निर्धारित नियमों और वैधानिक स्वीकृतियों के अनुरूप होना अनिवार्य है तथा भविष्य में भी अवैध निर्माणों और अनधिकृत गतिविधियों के विरुद्ध कार्रवाई जारी रहेगी।
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