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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बी.सी. खंडूरी का निधन, प्रदेश में शोक की लहर,सीएम धामी ने जताया शोक, सैन्य अधिकारी से मुख्यमंत्री तक का सफर

@शब्द दूत ब्यूरो (19 मई 2026)

उत्तराखंड की राजनीति के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी (बी.सी. खंडूरी) का निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे खंडूरी ने देहरादून में अंतिम सांस ली।

बताया जा रहा है कि खंडूरी पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। हाल ही में भी उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई गई थी, जहां कई नेताओं ने उनसे मुलाकात कर हालचाल जाना था।

1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे खंडूरी ने अपने करियर की शुरुआत भारतीय सेना से की और मेजर जनरल के पद तक पहुंचे। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हुए।

वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री दो बार रहे—पहली बार 2007 से 2009 तक और दूसरी बार 2011 से 2012 तक। इसके अलावा वे केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री भी रहे और गढ़वाल से सांसद भी चुने गए।

खंडूरी को साफ-सुथरी छवि और सख्त प्रशासनिक फैसलों के लिए जाना जाता था। उनके कार्यकाल में लोकायुक्त कानून और पारदर्शी शासन व्यवस्था को लेकर उठाए गए कदमों की काफी सराहना हुई थी।

उनकी बेटी ऋतु खंडूरी भूषण वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष हैं और राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

उनके निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने शोक संदेश में कहा है कि

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ।

श्री खंडूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सैन्य जीवन से लेकर सार्वजनिक जीवन तक उनका व्यक्तित्व राष्ट्रहित और जनसेवा के प्रति समर्पित रहा।

राजनीतिक जीवन में उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। एक जननेता के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास हेतु अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता से लोगों के हृदय में विशेष स्थान बनाया। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।

ईश्वर से प्रार्थना है कि पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान तथा शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

खंडूरी के निधन पर राज्य और देशभर के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्हें एक ईमानदार, सादगीपूर्ण और जनसेवा को समर्पित नेता के रूप में याद किया जा रहा है।

बी.सी. खंडूरी का निधन उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने न केवल प्रशासनिक स्तर पर बल्कि राज्य के विकास और राजनीतिक संस्कृति को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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