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काशीपुर की पहल को अंतरराष्ट्रीय पहचान: ‘आने वाले 50 तारे’ से जुड़ा ऑक्सफोर्ड, अनाथ बच्चों को मिल रहा स्किल का सहारा, उर्वशी दत्त बाली ने की थी शुरूआत

@शब्द दूत ब्यूरो (16 अप्रैल 2026)

काशीपुर। उत्तराखंड के काशीपुर से शुरू हुई एक अनोखी सामाजिक पहल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है। “आने वाले 50 तारे” नाम से शुरू किया गया यह अभियान, जिसकी शुरुआत उर्वशी दत्त बाली द्वारा की गई, अब नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। इस पहल का उद्देश्य अनाथ बच्चों को केवल शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें विभिन्न व्यावहारिक कौशलों से सशक्त बनाना है।

आज के दौर में जहां केवल डिग्री को सफलता का आधार माना जाता है, वहीं इस पहल ने यह साबित करने की कोशिश की है कि स्किल्स ही असली ताकत हैं। इसी सोच के साथ बच्चों को सिलाई, बेकिंग, होटल सर्विस, फोटोग्राफी, इंग्लिश स्पीकिंग, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, हेयर ड्रेसिंग, प्लंबिंग, बिजली कार्य और डिजिटल स्किल्स जैसी कई उपयोगी ट्रेनिंग दी जा रही है। साथ ही, अमेरिका में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाले शांतनु चिकारा बच्चों के कम्युनिकेशन और आत्मविश्वास पर विशेष कार्य कर रहे हैं।

इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसे अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी प्राप्त हो गया है। यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग से जुड़े स्कॉलर और यश फाउंडेशन इंडिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर तेजस डोंगरे इस अभियान से जुड़ चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में बच्चों के विकास के लिए नई योजनाओं पर काम शुरू हो चुका है।

यश फाउंडेशन इंडिया पिछले 14 वर्षों से ग्रामीण भारत में शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में सक्रिय है, और अब उत्तराखंड में इस पहल के जरिए बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

इस कार्यक्रम का संचालन द गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल के सहयोग से किया जाएगा, जहां चयनित 50 बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए हर महीने विशेष गतिविधियां आयोजित होंगी। इसके साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस राजकीय इंटर कॉलेज, पीरू मदारा के खंड शिक्षा अधिकारी श्री साहू और प्रधानाचार्य ए.के. पांडे भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे सरकारी विद्यालयों के छात्रों को भी नए अवसर मिल रहे हैं।

गुरुकुल स्कूल प्रबंधन—चेयरमैन डॉ. नीरज कपूर, डायरेक्टर डॉ. वसुधा कपूर और प्रधानाचार्या मीनल बधवार—भी इस पहल में लगातार सहयोग दे रहे हैं। उनका मानना है कि समाज को शिक्षा के माध्यम से वापस देना हम सभी की जिम्मेदारी है।

यह पहल केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक मजबूत संकल्प है—बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने का, उनके सपनों को साकार करने का और उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने का। काशीपुर की जनता भी इस मिशन में बढ़-चढ़कर सहयोग कर रही है, जिससे यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है।

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