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काशीपुर: सांसद निधि से आवंटित पांच लाख की राशि, विवादों में घिरी पर्वतीय समाज की महत्वपूर्ण बैठक में क्या होगा आज महत्वपूर्ण निर्णय? युवा वर्ग की नाराज़गी,पार्षद पुष्कर बिष्ट लड़ सकते हैं अध्यक्ष पद का चुनाव

@शब्द दूत ब्यूरो (31 अक्टूबर 2023)

काशीपुर। देवभूमि पर्वतीय महासभा एक बार फिर चर्चाओं में है। विवाद को सुलझाये बगैर सांसद निधि से पांच लाख की घोषणा के बाद अब सवाल यह उठता है कि जब मौजूदा समय में देवभूमि पर्वतीय महासभा की कार्यकारिणी का विवाद चल रहा है तो सासंद निधि से एक विवादित संस्था को दी गई धनराशि किस तरह से आवंटित हो पायेगी?

यहां यह बताना जरूरी है कि कुछ समय पूर्व महासभा का विवाद करीब करीब सुलझा लिया गया था। लेकिन बाद में स्थिति जस की तस बनी रही। मीडिया में भी विवाद सुलझने की खबरें आने के बाद पर्वतीय समाज के लोगों ने राहत की सांस ली थी। पर वास्तव में विवाद सुलझने के बजाय और बढ़ गया। दरअसल पूर्व अध्यक्ष को लेकर की गई टिप्पणियों की वजह से देवभूमि पर्वतीय महासभा विवादित ही रही। हालांकि श्री रामलीला का मंचन निर्बाध रूप से हुआ ।

अब आज एक रेस्टोरेंट में पर्वतीय समाज की बैठक का आयोजन होना है। बैठक में प्रमुख रूप से सांसद व केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट द्वारा सांसद निधि से स्वीकृत पांच लाख की राशि तथा आगामी चुनाव को लेकर मंथन होने की बात सामने आई है ।

वैसे तो यह सांसद का अधिकार है कि वह अपनी सांसद निधि किस तरह उपयोग करते हैं। लेकिन यहां देवभूमि पर्वतीय महासभा को सांसद निधि दी गई या किसी अन्य स़स्था को! यह स्पष्ट होना जरूरी है। देवभूमि पर्वतीय महासभा की कोई कार्यकारिणी तब तक अस्तित्व में नहीं है जब तक कि वैधानिक रूप से चुनाव संपन्न होकर वैध कार्यकारिणी घोषित न की जाये।

उधर मनोनीत पार्षद तथा पर्वतीय समाज के सशक्त नेताओं में माने जाने वाले पुष्कर बिष्ट देवभूमि पर्वतीय महासभा के अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। शब्द दूत से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह समाज के लोगों की इच्छा पर महासभा के अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ेंगे अगर चुनाव की घोषणा होती है। वैसे भी देवभूमि पर्वतीय महासभा में जो विवाद उत्पन्न हुआ था उसका मुख्य कारण चुनाव की ही मांग थी। अब पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जीना के विरोधी खेमे ने महासभा के चुनाव को लेकर चुप्पी साध ली है। इससे महासभा के सदस्यों में थोड़ी नाराज़गी देखी जा रही है। बताया जाता है कि यही कारण है कि अब कुछ लोग नयी कार्यकारिणी के गठन की पहल कर रहे हैं।

बहरहाल आज की बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समझा जाता है कि इस बैठक में चुनाव को लेकर कोई सकारात्मक निर्णय हो सकता है। उधर पर्वतीय समाज का युवा वर्ग इस बैठक पर ही सवाल उठा रहा है।

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