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उत्तराखंड कांग्रेस की रार और बढ़ी,गुटबाजी के आरोपों से आहत प्रीतम सिंह की इस्तीफे की पेशकश? सीएम धामी से मुलाकात ने सियासी पारा चढ़ाया

@शब्द दूत ब्यूरो (11 अप्रैल, 2022)

राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोग कभी अपनों से तो कभी विरोधियों से मिलते ही रहते हैं। लेकिन कुछ मुलाकातों की टाइमिंग ऐसी होती है जिससे फिजा में तरह-तरह के सवाल तैरने लगते हैं और उनके मायने तलाश किए जाने लगते हैं। ये बात थी एक विधायक के मुख्यमंत्री से मिलने की, लेकिन राजनीति में इसे बतंगड़ तो बनाया ही जा सकता है। वहीं प्रीतम सिंह ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की है उन्होंने कहा कि अगर उत्तराखंड में कांग्रेस उनकी वजह से हारी है तो वह इस्तीफा देने को भी तैयार हैं।

प्रीतम सिंह ने कहा पार्टी के प्रदेश महामंत्री संगठन वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने पार्टी की हार के लिए गुटबाजी को वजह बताते हुए उन पर भी आरोप लगाए हैं। ऐसे में वह पार्टी हाईकमान से मांग करते हैं कि इस पूरे प्रकरण की जांच की जाए। यदि कोई गुटबाजी हुई है तो उनसे विधायक पद का भी इस्तीफा ले लिया जाए। प्रीतम सिंह ने कहा जब तक इस मामले में जांच नहीं हो जाती तब तक वे पार्टी में कोई पद नहीं लेंगे।

प्रीतम सिंह की नाराजगी के चलते रविवार देर शाम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कांग्रेस के कद्दावर नेता और चकराता से विधायक प्रीतम सिंह के बीच हुई। इसे मात्र संयोग कहें या पहले से तयशुदा कार्यक्रम क्योंकि मुलाकात से ठीक पहले कांग्रेस आला कमान ने प्रदेश अध्यक्ष, नेता और उपनेता प्रति पक्ष के नामों का एलान किया था। चूंकि इस बार प्रीतम सिंह से नेता प्रतिपक्ष का पद छिन गया है, लिहाजा राजनीति के गलियारों में इस मुलाकात के बाद चटकारे लिए जाने लगे।

कांग्रेस आलाकमान फुल टाइम अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मामले में एक माह से फैसला लेने में टालमटोल कर रहा था। प्रीतम खेमा नेता प्रतिपक्ष को लेकर काफी आश्वस्त भी नजर आ रहा था। लेकिन जैसे ही नामों की घोषणा हुई, प्रीतम सिंह का खेमा यशपाल आर्य, भुवन कापड़ी, करण माहरा को तवज्जो देने से भड़क उठा। कई लोगों के इस्तीफों ने प्रीतम खेेमे की नाराजगी पर मुहर भी लगा दी।

सियासी पंडितों का मानना है कि पार्टी में अपनी रुसवाई से क्षुब्ध प्रीतम सिंह ने अप्रत्याशित रूप से प्रीतम सिंह ने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से मुलाकात करके कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। हालांकि इस मुलाकात के बारे में प्रीतम और मुख्यमंत्री दोनों के करीबी लोगों का कहना है कि चर्चा राज्य के विकास और बेहतरी को लेकर हुई। लेकिन मुलाकात जिस हालात में हुई उसको लेकर सियासी पंडितों का मानना है कि पार्टी में अपनी रुसवाई से क्षुब्ध प्रीतम अपने और अपनों के लिए सियासी विकल्प तलाश रहे हैं।

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