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उत्तराखंड से लगी नेपाल की सीमा पर तेजी से हो रहा है जनसंख्या में बदलाव, सुरक्षा एजेंसियों ने बताया देश के लिए खतरा

उत्तराखंड से लगे नेपाल की सीमा पर तेजी से जनसंख्या में बदलाव हो रहा है जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने भारत के लिए खतरा बताया है। नेपाली सीमा पर मूल निवासियों का पलायन हुआ है और समुदाय विशेष के लोगों ने संसाधनों पर कब्जा कर वर्चस्व बना लिया है। 2012 से 22 के मध्य के वर्षों में नेपाल का पूरा समीकरण बदला है।

@शब्द दूत ब्यूरो (10 अप्रैल, 2022)

उत्तराखंड से लगते नेपाल के सीमावर्ती जिलों में तेजी से जनसांख्यिकीय बदलाव (डेमोग्राफिक चेंज) हो रहा है। 26 जनवरी 2022 को जारी नेपाल की जनगणना में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह बदलाव अचानक नहीं हुआ है। सुरक्षा एजेंसियां इसे सुनियोजित साजिश बताती हैं। इसे लेकर नेपाल के साथ ही भारत की भी चिंता बढ़ी है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार 2012 से 22 के मध्य के वर्षों में नेपाल का पूरा समीकरण बदला है। गोरखा की आबादी में तो 18,860 की कमी आई है। वहीं, भारत से लगते नेपाली जिले कैलाली और कंचनपुर की जनसंख्या वृद्धि दर सामान्य पहाड़ी जिलों के 0.93 के सापेक्ष 1.54 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार कंचनपुर की वार्षिक वृद्धि दर 1.32 प्रतिशत दर्ज की गई है।

नेपाल के केंद्रीय सांख्यिकी विभाग के अनुसार 2012 में कैलाली की जनसंख्या सात लाख 75 हजार 709 थी। अब यह बढ़कर नौ लाख 11 हजार 155 तक पहुंच गई है। यानी कुल एक लाख 35 हजार 446 आबादी बढ़ी। ठीक इसी प्रकार कंचनपुर की जनसंख्या चार लाख 51 हजार 248 से बढ़कर पांच लाख 17 हजार 645 हो गई है। 10 साल में इस प्रमुख सीमांत जिले की आबादी में 66 हजार 397 की वृद्धि दर्ज की गई है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार भारत से लगते नेपाली जिलों में आए जनसांख्यिकीय बदलाव में अहम वजह पलायन है। नेपाल के मूल निवासी पलायन कर दूसरे शहरों में काम के लिए गए। लेकिन एक समुदाय विशेष ने पहाड़ का रुख कर वहां के संसाधनों पर कब्जा जमा लिया। बीते 10 वर्षों में इन्होंने खुद को इतना सक्षम बना लिया कि सामाजिक, आर्थिक व सांस्कृतिक व्यवस्था को भी प्रभावित करने लगे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ नेपाल के रास्ते उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल में सक्रिय है। जून 2000 में भी भारत-नेपाल सीमा पर तेजी से बन रहे धर्म विशेष के स्थलों से सावधान रहने की चेतावनी जारी गई थी। अब नेपाली जिलों में तेजी से आए बदलाव सतर्क करने वाले हैं।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार बांग्लादेश, बिहार, नेपाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के मध्य सुनियोजित तरीके से धर्म विशेष के लिए गलियारा तैयार किया जा रहा है। साजिश पाकिस्तान को इस गलियारे से जोडऩे की है। इसमें बीते 10 वर्षों में शरणाॢथयों के नाम पर बड़ी आबादी इस गलियारे में शिफ्ट भी की गई है।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, योजना के तहत धर्म विशेष के शिक्षण संस्थानों को उन्हीं क्षेत्रों में ज्यादातर खोला जा रहा है जो सामरिक रूप से अहम हैं। इसी श्रेणी में उत्तराखंड के पिथौरागढ़, ऊधम सिंह नगर व चंपावत भी आते हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर व बस्ती मंडल को भी इसी क्रम में चुना गया है।

नेपाल मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल हमारा मित्र राष्ट्र है। उससे रोटी-बेटी के मधुर संबंध हैं। लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर अब हमें अलर्ट होना होगा। नेपाल को भारत से बेहतर सहयोगी और दोस्त कहीं नहीं मिलेगा। लेकिन ओली सरकार में वहां जिस तरह से चीन व पाकिस्तान की दखल बढ़ी वह आने वाले दिनों में कई गंभीर समस्या बनेगी।

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