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त्रिवेन्द्र सिंह रावत को फिर कमान सौंपकर डैमेज कंट्रोल हो सकता है,प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का दावा

पहले त्रिवेन्द्र सिंह रावत को हटाकर भाजपा हाईकमान ने उत्तराखंड में भारी गलती की। यह बात शायद भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की समझ में आ गई। लेकिन जब तक समझ आयी तब तक देर हो चुकी थी। उससे भी बड़ी गलती फिर भाजपा कर दी तीरथ सिंह रावत को हटाने का फैसला कर लिया।

एक राजनैतिक जानकार और प्रदेश भाजपा के बड़े नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री बदलने का खेल खेलने से जो डैमेज हुआ है उसे कुछ हद तक भाजपा कंट्रोल कर सकती है। इनका मानना है कि चुनाव में अगर भाजपा को जनता को जबाब देना है तो एक बार फिर त्रिवेन्द्र सिंह रावत को प्रदेश की कमान सौंपी जानी चाहिए। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि तीसरे मुख्यमंत्री का कार्यकाल इतना कम होगा कि उसके काम पर जनता के बीच जाकर भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं के पास कुछ नहीं होगा। अगर भाजपा अपनी सरकार के नाम पर वोट मांगने जनता के बीच जायेगी तो उसे इस बात का भी जबाब देना होगा कि प्रचंड बहुमत के बाद भी आपकी सरकार स्थिर नहीं रह पाई। पांच साल में तीन मुख्यमंत्री बदलकर भाजपा ने खुद अपनी किरकिरी करवा दी है।

त्रिवेन्द्र सिंह रावत साढ़े चार साल मुख्यमंत्री रहे हैं उनके पास भाजपा के साथ-साथ अपनी मुख्यमंत्रित्व काल की उपलब्धियों का कुछ तो लेखा जोखा होगा।

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