
अपने देश में अनेक स्वनामधन्य कलाकार हैं उनकी विशेष प्राप्ति हमेशा अनुकरणीय उदाहरण ही है ।
उत्तराखंड गढ़वाल के पौड़ी शहर के एक बेहतरीन कलाकार मोहन सिंह रावत ने अपनी 20 वर्षों की तपस्या, अद्भुत खोज व कौशल से एक बेहतरीन साज़ का आविष्कार किया है । बैंजो संगीत में प्रयोग किये जाने वाला सुंदर वाद्ययंत्र है । इस वाद्ययंत्र का वादन ज़्यादातर क़व्वाली, व मज़ार पर गाये जाने वाले क़लामों में होता है ।उत्साह, उन्माद, आनंद में चार चांद लगाने वाले इस वाद्ययंत्र का संवर्धन और निखार लाने में मोहन सिंह रावत ने अपना अद्भुत कौशल प्रदर्शित किया ।
सितार,सरोद,स्वरमंडल,वीणा,संतूर,रबाब,बैंजो जैसे सुन्दर कठिन वाद्ययंत्रों की जैसे एक साथ बैठक हो रही हो । इन सभी वाद्ययंत्रों की आवाज़ बराबर अपने स्वभाव और गुण पर विद्यमान रहे इस काम पर बहुत मेहनत की है रावत जी ने । हाथ की पाँचों अँगुलियों(अँगूठे से आख़िरी छोटी अंगुली तक) का सम्पादन एक साथ कौतूहल पैदा करता है । पहली बार मुझे देखने को मिला । हर्षवर्धन जी के शास्त्रीय वादन ऑडियो सुना अद्भुत है। बैंजों जैसे सरल सामान्य दिखने वाले वाद्ययंत्र पर एक साथ इतने सारे वाद्ययंत्र अपनी छटा बिखेरने को आतुर हैं ।एक बेहतरीन नया पर कठिन साज़ लगा मुझे ।
समय-समय पर अनेक मनीषियों ने अलग-अलग वाद्ययंत्रों पर प्रयोग किये हैं जैसे प्रसिद्ध सितार वादक डाॅ डी.आर.पर्वर्तिकर जी (विचित्र वीणा) पं. विश्वमोहन भट्ट जी(गिटार) और भी हो सकते हैं मेरे ज्ञान में नहीं । पर कलाकार मोहन सिंह रावत का अथक प्रयास ये वाद्ययंत्र ,देश ही नहीं अपितु विश्व के कला विदों ,कला पारखियों के हाथों सम्मान प्राप्त कर उनका, भारत का व उत्तराखंड का नाम संगीत क्षेत्र के शिखर पर स्थापित करेगा। 

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