@विनोद भगत
एक तरफ हम संस्कारों की बात करते हैं तो दूसरी तरफ संस्कार की बात करने वालों को समाज में प्रताड़ित भी करते हैं। दरअसल उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के ताजा बयान को लेकर विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया आ रही है।
महिलाओं को लेकर दिये गये बयान काफी संवेदनशील होते हैं। पर तीरथ सिंह रावत के इस बयान में क्या कुछ ऐसा है जिससे संस्कार पर चोट पहुंची है? या फटी जींस पहनने से संस्कारों की रक्षा होती है। वास्तव में यह प्रश्न काफी गंभीर है। दरअसल आजकल बयान देने वाला कौन हैं इस पर काफी कुछ निर्भर करता है। अगर वह राजनैतिक व्यक्ति है तो उसका अपने अपने हिसाब से मतलब निकाला जाता है।
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के बयान को गलत परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि एन जी ओ चलाने वाला कोई भी शख्स महिला व पुरूष हो उसके आचार व्यवहार व वस्त्र एक आदर्श स्वरूप में होने चाहिए। क्योंकि समाज के सामने एनजीओ चलाने वाले एक उदाहरण के रूप में होते हैं। मुख्यमंत्री ने महिलाओं पर नहीं वरन समाज सेवा कर रहे लोगों को आगाह किया है। भाजपा अपने संस्कारों पर चलती है और संस्कार की शिक्षा देना क्या गलत है?
सीएम तीरथ सिंह रावत के महिलाओं की घुटने से फटी जींस को लेकर दिये गये बयान पर बहस शुरू हो गई है। इस बहस में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की भाजपा के नेताओं की ओर से बचाव में कोई बयान नहीं आया है। यह अपने आप में आश्चर्यजनक है।
क्यों भाजपा के नेता अपने मुख्यमंत्री के समर्थन में नहीं आ रहे? सूबे के मुख्यमंत्री के इस बयान के परिप्रेक्ष्य में आ रही विपक्ष की प्रतिक्रियाओं पर भाजपा के तमाम दिग्गज नेताओं की चुप्पी से लगता है मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत अलग थलग पड़ गये हैं।
भाजपा संस्कार वाली पार्टी कहलाई जाती है। और अपनी पार्टी के मुख्यमंत्री के संस्कार वाले बयान पर अकेले पड़ रहे मुख्यमंत्री को अपने ही लोगों का साथ नहीं मिल रहा है। उनके किसी भी मंत्रिमंडलीय सहयोगी या संगठन के पदाधिकारियों की ओर विपक्ष को कोई जबाब नहीं दिया जाना किस ओर इशारा कर रहा है।



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