जोशीमठ। बीआरओ ने रिकार्ड समय में वैली ब्रिज तैयार कर दिया। जिससे सीमाओं तथा सडक संपर्क से कट चुके गाॅवों की यातायात व्यवस्था बहाल हुई। वैली ब्रिज का शिवालिक परियोजना के मुख्य अभियन्ता एएस राठौड ने पूजा/अर्चना कर विधिवत शुभांरम्भ किया।
ऋषि गंगा त्रासदी के दिन सात फरवरी को रैणी में सीमा को जोडने वाला एक मात्र मोटर वाहन पुल भी जलजले की भेंट चढ गया था। उस दिन से रैणी से आगे के गाॅवों तथा सीमाओं तक वाहनों की आवाजाही ठप हो गई थी। सीमा सडक संगठन ने बिना देरी के तत्काल मौके पर पंहुचकर उस स्थान पर वैली ब्रिज लाॅच किए जाने की येाजना पर कार्य शुरू किया और सर्वे कर दोनों ओर एबेडमेंट निर्माण के लिए स्थल चयन किया। और रिकार्ड समय में दो सौ फीट लंबा व करीब 30 टन वजन वहन करने की क्षमता वाला वैली ब्रिज तैयार किया।
ऋषि गंगा आपदा के दूसरे दिन ही बीआरओ की शिवालिक परियोजना के मुख्य अभियन्ता एएस राठौड ने रैणी पंहुचकर वैली ब्रिज के लिए साइड सलेक्सन व सर्वे का कार्य पूरा कराया व कई दिनो तक स्वय मौके पर मौजूद रहकर एबेडमेंट का कार्य करवाया। इस दौरान बीआरओ को कई समस्याओ से भी जूझना पडा। सभी दिक्कतो को दूर करते हुए आखिरकार सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए वाहनो की आवाजाही शुरू हो सकी।


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