@विनोद भगत
नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल में एक समानता है। यही समानता दोनों को लोकप्रिय या अलोकप्रिय बना रही है। दोनों ही नेताओं को अपने ही विरोधियों से प्रचार कराने में महारथ हासिल है। और अपनी इसी समानता के चलते मोदी और अरविंद केजरीवाल भारतीय राजनीति के शिखर पर पहुंचे हैं। यहाँ लोगों कह सकते हैं कि मोदी और अरविंद केजरीवाल की तुलना नहीं हो सकती। लेकिन लोग यह भूल जाते हैं कि स्वयं नरेंद्र मोदी एक साक्षात्कार के दौरान खुद यह कह चुके हैं कि उन्हें तो गालियां खाने की आदत है। वह जानते हैं कि लोग उन्हें रोज गालियां देते हैं। दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल को भी रोज गरियाया जाता रहा है।
ये आश्चर्यजनक है कि मोदी और केजरीवाल ये दोनों ही नेता अपने आलोचकों की वजह से राजनीति में चर्चित चेहरे बने हुए हैं। दोनों को ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी मिले हैं। दोनों ही राजनेताओं ने प्रचंड बहुमत प्राप्त करने की क्षमता है। और यह कहना गलत नहीं होगा कि अपने विरोधियों और आलोचकों की वजह से इन दोनों ने अपने अपने मुकाम हासिल किये हैं। एक फर्क है दोनों में केजरीवाल जहाँ प्रदेश स्तर पर अपनी लोकप्रियता के बलबूते पर प्रचंड बहुमत लाये हैं वहीं प्रधानमंत्री मोदी पूरे देश में।
भारतीय राजनीति की यह अजीबोगरीब घटनायें हैं। विरोध के बावजूद राजनीति के उच्च शिखर पर पहुंचे ये दोनों राजनेता भारतीय राजनीति के बदलते स्वरूप का परिचायक हैं। मोदी जहाँ राष्ट्रवाद और हिंदू एकता के नारे के साथ सफलता के शिखर पर हैं केजरीवाल आम आदमी की पीड़ा और उनके समाधान की कोशिश करते दिखाई देते हैं।

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