@विनोद भगत
उत्तराखंड में भाजपा कांग्रेस की जुबानी लड़ाई आजकल काफी जोरों पर है। प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत का सोशल मीडिया पर एक दूसरे से संवाद के रूप में लोग नाटकीय डायलॉग का आनंद उठा रहे हैं।
पर इस डॉयलाग के बीच एक महत्वपूर्ण तथ्य निकल कर सामने आ रहा है। जिसे भाजपा तो स्वीकार कर रही है और खुलेआम स्वीकार कर रही है। बिडम्बना की बात तो यह है कि प्रदेश कांग्रेस के नेता इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं। राज्य कांग्रेस में हरीश रावत ही एक ऐसा नेता है जो भाजपा को टक्कर दे पाने में सक्षम है। उत्तराखंड में भाजपा जानती है कि कांग्रेस का कौन सा नेता उनके लिए खतरा बन सकता है। इसलिए हरीश रावत के बयान पर तत्काल भाजपा की ओर से हमला शुरू हो जाता है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत के जबाबी हमले पर प्रदेश कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी यह साबित करती है कि कुछ लोग हरीश रावत को मैदान में अकेले छोड़कर इस बयानबाजी का सिर्फ आनंद ले रहे हैं। उन्हें पार्टी से ज्यादा इस बात डर है कि अगर वह खुलकर हरीश रावत के समर्थन में आते हैं तो उनकी राजनीतिक जमीन न हिल जाये।
हरीश रावत के अलावा प्रदेश कांग्रेस के किसी अन्य नेता पर भाजपा की ओर से इतने तीखे हमले नहीं किये जाते। यहाँ तक कि हरीश रावत की तुलना बंशीधर भगत ने कालनेमि राक्षस से कर दी। इस पर हरीश रावत के अलावा किसी अन्य दिग्गज कांग्रेस नेता का बयान न आना इस बात को साबित करता है कि हरीश रावत कांग्रेसी राजनीति के रण में अकेले छोड़ दिये गये हैं। प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह हों या डा इंदिरा ह्रदयेश या कोई अन्य नेता आखिर चुप क्यों हैं?
भाजपा पर हमला क्या केवल पुतला फूंक राजनीति तक ही सीमित कर दिया गया है?