@शब्द दूत ब्यूरो (15 अक्टूबर 2026)
देहरादून। उत्तराखंड का बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में है। अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा दिल्ली में धरना दिए जाने और विपक्ष की ओर से मामले को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद यह प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इसी बीच उत्तराखंड पुलिस ने हत्याकांड की जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी, न्यायालय में अभियोजन की पैरवी और दोषियों को सजा दिलाने तक की कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा सामने रखा है। पुलिस ने बताया कि मामले में तीनों दोषियों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है, जबकि प्रकरण से संबंधित सीबीआई जांच भी जारी है।
उत्तराखंड के अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में ऋषिकेश के समीप वनंतरा रिजॉर्ट में कार्यरत युवती अंकिता भंडारी के साथ हुई घटना के बाद उत्तराखंड पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी थी। घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया था।
डॉ. मुरुगेशन के अनुसार, मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था। जांच को निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए डीआईजी स्तर की महिला आईपीएस अधिकारी को एसआईटी का अध्यक्ष बनाया गया। एसआईटी को मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच करने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में मजबूत अभियोजन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
पुलिस के मुताबिक, एसआईटी ने जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्यों का विस्तृत संकलन किया। इसके अलावा अभियुक्तों से पूछताछ, गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों का बारीकी से परीक्षण किया गया। जांच टीम ने विभिन्न साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए महज 88 दिनों में विवेचना पूरी कर लगभग 500 पृष्ठों का विस्तृत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए गए। एसआईटी की ओर से जुटाए गए साक्ष्यों और न्यायालय में प्रस्तुत किए गए तथ्यों के आधार पर कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने 30 मई 2025 को तीनों अभियुक्तों पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराया। न्यायालय ने तीनों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। पुलिस के अनुसार, तीनों दोषी वर्तमान में जेल में निरुद्ध हैं और अपनी सजा काट रहे हैं।
अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. मुरुगेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में सीबीआई जांच की कार्यवाही जारी है। उनके मुताबिक, प्रकरण के संबंध में एफआईआर दर्ज होने के बाद राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसका संज्ञान लिया और केंद्र सरकार से सीबीआई जांच की संस्तुति की। राज्य सरकार की संस्तुति स्वीकार किए जाने के बाद मामले में सीबीआई जांच आगे बढ़ रही है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर हाल के दिनों में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। अंकिता के माता-पिता के दिल्ली में धरने के बाद विपक्ष ने मामले को लेकर सरकार और भाजपा पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष की ओर से दुष्यंत गौतम को लेकर भी राजनीतिक आरोप लगाए जा रहे हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच उत्तराखंड पुलिस ने अपने आधिकारिक पक्ष में अब तक की जांच, गिरफ्तारी, आरोपपत्र, न्यायालय के फैसले और जारी सीबीआई जांच का विवरण सामने रखा है। हालांकि, किसी व्यक्ति के संबंध में लगाए गए आरोपों और न्यायालय द्वारा स्थापित तथ्यों के बीच अंतर करना आवश्यक है।
पुलिस का कहना है कि घटना के सामने आने के बाद त्वरित गिरफ्तारी, एसआईटी का गठन, साक्ष्यों का संकलन और समयबद्ध विवेचना इस मामले की जांच के प्रमुख चरण रहे। पुलिस के अनुसार, अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के बाद तीनों अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया और उन्हें आजीवन कठोर कारावास की सजा मिली।
अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को सजा सुनाए जाने के बावजूद प्रकरण से जुड़े सवाल और सीबीआई जांच के पहलू सार्वजनिक चर्चा में बने हुए हैं। ऐसे में सीबीआई जांच की वर्तमान स्थिति और उससे सामने आने वाले तथ्यों पर भी लोगों की निगाहें टिकी हैं। फिलहाल उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में न्यायालय द्वारा तीनों दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है और संबंधित सीबीआई जांच जारी है।
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