मामले के सामने आने के बाद नर्सिंग रजिस्ट्रेशन की विश्वसनीयता और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। NSUI ने इस मामले की स्वतंत्र तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराने तथा जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग की है।
@शब्द दूत ब्यूरो (30 सितंबर 2026)
भोपाल। मध्य प्रदेश में नर्सिंग रजिस्ट्रेशन की ऑनलाइन व्यवस्था को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक टेस्ट आवेदन में गधे की तस्वीर और फर्जी जानकारी दर्ज किए जाने के बावजूद नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी होने का दावा किया गया है। मामले के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) की ऑनलाइन सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
यह मामला NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार द्वारा किए गए एक टेस्ट आवेदन से जुड़ा है। परमार के अनुसार, उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल की जांच के लिए आवेदक के नाम में ‘डंकी’ लिखा और फोटो के स्थान पर गधे की तस्वीर अपलोड की। माता-पिता के नाम में ‘डंकी फादर’ और ‘डंकी मदर’ तथा जाति के स्थान पर ‘एनिमल’ जैसी जानकारी दर्ज की गई। इसके अलावा पता, शैक्षणिक अंक और रोल नंबर जैसी जानकारियां भी गलत दर्ज की गईं।
रवि परमार का दावा है कि निर्धारित 2,050 रुपये शुल्क जमा करने के कुछ ही मिनटों बाद ऑनलाइन सिस्टम ने रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया। उनका कहना है कि इस पूरे प्रयोग का उद्देश्य यह जांचना था कि रजिस्ट्रेशन से पहले आवेदक की पहचान और दस्तावेजों का किस स्तर तक सत्यापन किया जाता है।
मामले के सामने आने के बाद नर्सिंग रजिस्ट्रेशन की विश्वसनीयता और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं। NSUI ने इस मामले की स्वतंत्र तकनीकी और प्रशासनिक जांच कराने तथा जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग की है।
हालांकि, मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की ओर से बताया गया है कि ऐसा प्रमाणपत्र प्रोविजनल यानी अस्थायी पंजीयन था। काउंसिल के मुताबिक, आवेदन के बाद दस्तावेजों और योग्यता का ऑनलाइन सत्यापन दूसरे चरण में किया जाता है और फर्जी जानकारी पाए जाने पर पंजीयन रद्द किया जा सकता है। हालिया मामलों के बाद अतिरिक्त सिस्टम चेक लागू करने के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोके जाने की भी जानकारी सामने आई है।
इस मामले ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि अस्थायी प्रमाणपत्र जारी होने से पहले आवेदक की पहचान और बुनियादी जानकारी की जांच किस स्तर पर होती है और ऑनलाइन व्यवस्था में फर्जी जानकारी को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं या नहीं।
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