@शब्द दूत ब्यूरो (16 सितंबर 2026)
नई दिल्ली/देहरादून। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता हरीश रावत ने ईडी प्रकरण को लेकर सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि कांग्रेस या किसी अन्य व्यक्ति को बचाव की मुद्रा में आने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि वह जांच से बचने के बजाय जांच एजेंसियों को अपने कार्यकाल की जांच के लिए आमंत्रित करने की मुद्रा में हैं।
हरीश रावत ने कहा कि उनके तीन साल के कार्यकाल में हुई सभी नियुक्तियों की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में 42 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां की गईं, जबकि कई सरकारें और मुख्यमंत्री 10 साल में भी इतनी नियुक्तियां नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि इन नियुक्तियों की जांच की जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आपदा के दौरान हुए पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यों की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार बचाने या गिराने से जुड़े कथित स्टिंग की भी जांच कराई जानी चाहिए। रावत ने इसके लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का संयुक्त कमीशन गठित कर उनके कार्यकाल के साथ-साथ उनके मुख्यमंत्री रहते हुए किए गए कार्यों की जांच कराने की बात कही।
हरीश रावत ने कहा कि किसी पर कोई दबाव न हो और किसी को उनके बचाव की मुद्रा में न आना पड़े, इसलिए उन्होंने अपने पास मौजूद दायित्वों से त्यागपत्र देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि वह इस स्थिति का सामना केवल एक सामान्य हरीश रावत के रूप में करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि संविधान और कानून में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिसके तहत पूर्व में रहे संवैधानिक पदों की शपथ और पद की पहचान को पूरी तरह छोड़ा जा सके। हालांकि, उन्होंने इच्छा जताई कि उन्हें उत्तराखंड के एक सामान्य नागरिक के तौर पर ट्रीट किया जाए और उनके पूरे कार्यकाल की निष्पक्ष जांच हो।
रावत ने विशेष रूप से अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से उनके कार्यकाल में हुई नियुक्तियों की भी जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को उनके मामले में बचाव में बोलना पड़ रहा है, उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय उनकी ओर से की गई जांच की मांग को और मजबूती से उठाया जाना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं अपने कार्यकाल की नियुक्तियों से लेकर अन्य मामलों तक की जांच के लिए आवाज उठाई है और उनकी यह मांग है कि इस जांच के लिए एक व्यापक कमीशन गठित किया जाए, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल हो सके।
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