@शब्द दूत ब्यूरो (26 जून 2026)
हल्द्वानी (मोटाहल्दू)। कुमाऊं के कई क्षेत्रों में मानसून की बारिश समय पर नहीं पहुंचने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। धान की रोपाई के बाद खेतों में पर्याप्त पानी नहीं मिलने से फसल पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ऐसे में किसान अतिरिक्त खर्च उठाकर पाइप और मोटरों के सहारे खेतों की सिंचाई करने को मजबूर हैं ताकि धान की नाजुक पौध सूखने से बच सके।
हल्द्वानी के मोटाहल्दू क्षेत्र में कई किसान खेतों तक पाइप बिछाकर सिंचाई कर रहे हैं। जिन खेतों में सामान्यतः इस समय तक वर्षा का पानी भर जाता था, वहां इस बार पर्याप्त नमी नहीं होने से किसानों को लगातार पानी देना पड़ रहा है। सिंचाई के लिए डीजल और बिजली का खर्च बढ़ने से खेती की लागत भी बढ़ रही है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। कई स्थानों पर धान की पौध पीली पड़ने लगी है, जबकि कुछ खेतों में रोपाई का कार्य भी प्रभावित हुआ है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की देरी का सबसे अधिक असर धान जैसी पानी पर निर्भर फसलों पर पड़ता है। समय पर वर्षा नहीं होने से पौधों की बढ़वार रुक सकती है और उत्पादन में कमी आने की आशंका रहती है। उन्होंने किसानों को उपलब्ध जल स्रोतों का संतुलित उपयोग करने और खेतों में नमी बनाए रखने के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
किसानों की निगाहें अब पूरी तरह मानसून पर टिकी हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल बचाना मुश्किल हो जाएगा और खेती की लागत बढ़ने के साथ उत्पादन पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
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