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चेतावनी :पेपर कप में चाय पीना पड़ सकता है भारी, शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

@शब्द दूत ब्यूरो (16 जून 2026)

नई दिल्ली। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, दफ्तरों और चाय की दुकानों पर पेपर कप में चाय या कॉफी पीना आज आम बात हो गई है। पर्यावरण के अनुकूल समझे जाने वाले ये डिस्पोजेबल पेपर कप अब स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकते हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक शोध में खुलासा हुआ है कि गर्म चाय या कॉफी पेपर कप में डालने पर उसकी अंदरूनी प्लास्टिक कोटिंग टूटने लगती है और हजारों सूक्ष्म प्लास्टिक कण (माइक्रोप्लास्टिक्स) पेय पदार्थ में घुल जाते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार अधिकांश डिस्पोजेबल पेपर कपों के अंदर पॉलीथीन (HDPE) की एक पतली परत लगी होती है, जो कप को रिसने से बचाती है। अध्ययन में पाया गया कि जब 85 से 90 डिग्री सेल्सियस तापमान वाला गर्म पानी या पेय पदार्थ 15 मिनट तक कप में रखा जाता है, तो एक 100 मिलीलीटर पेपर कप से लगभग 25,000 माइक्रोप्लास्टिक कण निकलकर तरल पदार्थ में मिल जाते हैं।

शोध का नेतृत्व करने वाली वैज्ञानिक प्रोफेसर सुधा गोयल और उनकी टीम के अनुसार यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन तीन कप चाय या कॉफी पेपर कप में पीता है, तो वह लगभग 75,000 सूक्ष्म प्लास्टिक कण अपने शरीर में पहुंचा सकता है। ये कण इतने छोटे होते हैं कि नंगी आंखों से दिखाई भी नहीं देते।

अध्ययन में माइक्रोप्लास्टिक के अलावा फ्लोराइड, क्लोराइड, सल्फेट और नाइट्रेट जैसे आयनों के साथ-साथ सीसा (Lead), क्रोमियम (Chromium) और कैडमियम (Cadmium) जैसी विषैली भारी धातुओं के अंश भी पाए गए। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये तत्व लंबे समय तक शरीर में पहुंचने पर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रोप्लास्टिक कण शरीर में जमा होकर हार्मोनल असंतुलन, प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी, पाचन तंत्र की समस्याएं और कोशिकीय स्तर पर नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि कैंसर से सीधा संबंध स्थापित करने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने नियमित रूप से ऐसे कणों के सेवन को संभावित स्वास्थ्य जोखिम बताया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने लोगों को गर्म पेय पदार्थों के लिए डिस्पोजेबल पेपर कप के बजाय स्टील, कांच, चीनी मिट्टी (सिरेमिक) या पुनः उपयोग किए जा सकने वाले थर्मल कपों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। इससे न केवल माइक्रोप्लास्टिक के सेवन का खतरा कम होगा बल्कि पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।

माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है। IIT खड़गपुर का यह अध्ययन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण चेतावनी माना जा रहा है, जो बताता है कि रोजमर्रा की छोटी आदतें भी लंबे समय में स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं। ऐसे में चाय या कॉफी पीते समय बर्तन का चुनाव भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है जितना पेय पदार्थ की गुणवत्ता।

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