@शब्द दूत ब्यूरो (09 जून 2026)
काशीपुर। शहर के बहुचर्चित और लंबे समय से विवादों में रहे फ्लाईओवर की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। तीन दिन पहले फ्लाईओवर की रेलिंग क्षतिग्रस्त हो गई, लेकिन इसकी स्थायी मरम्मत कराने के बजाय विभाग ने टूटे हिस्से पर लकड़ी की तीन बल्लियां और कुछ अस्थायी अवरोधक लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली है। लगातार दौड़ रहे भारी वाहनों और बसों के बीच यह स्थिति किसी बड़े हादसे को न्योता देती दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित इस फ्लाईओवर की गुणवत्ता को लेकर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं। अब रेलिंग के क्षतिग्रस्त होने और उसके बाद किए गए अस्थायी इंतजामों ने इन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है। लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है।
इस फ्लाईओवर से जुड़ा सबसे बड़ा और दिलचस्प तथ्य यह है कि इसे शुरू हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन आज तक इसका विधिवत उद्घाटन नहीं हुआ। आमतौर पर सरकारें ऐसी बड़ी परियोजनाओं का उद्घाटन कर राजनीतिक और प्रशासनिक उपलब्धियों के रूप में जनता के सामने प्रस्तुत करती हैं। केंद्रीय या राज्य स्तर के मंत्री, जनप्रतिनिधि और अधिकारी उद्घाटन समारोह में शामिल होते हैं और परियोजना का श्रेय लेते हैं।
लेकिन काशीपुर फ्लाईओवर के मामले में ऐसा नहीं हुआ। यह सवाल आज भी चर्चा का विषय है कि आखिर सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुभारंभ करने कोई मंत्री या वरिष्ठ जनप्रतिनिधि क्यों नहीं आया? क्या इसके पीछे निर्माण संबंधी विवाद थे या गुणवत्ता को लेकर पहले से ही उठ रहे सवाल? यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है।
फ्लाईओवर के निर्माण काल से लेकर इसके संचालन तक कई बार विवाद सामने आए। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने इसकी उपयोगिता, यातायात व्यवस्था और निर्माण गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर आवाज उठाई। कई बार निर्माण सामग्री और कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न खड़े हुए।
शहर में यह चर्चा भी लंबे समय से होती रही है कि फ्लाईओवर की मूल डिजाइन में बाद में बदलाव किए गए थे। यदि यह दावा सही है तो यह गंभीर जांच का विषय हो सकता है, क्योंकि किसी भी बड़े सार्वजनिक निर्माण की डिजाइन में बदलाव सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों को सीधे प्रभावित कर सकते हैं।
यह पहला अवसर नहीं है जब फ्लाईओवर की स्थिति चर्चा में आई हो। इससे पहले भी इसके विभिन्न हिस्सों में टूट-फूट और तकनीकी खामियों की खबरें सामने आती रही हैं। अब रेलिंग का क्षतिग्रस्त होना और उसके स्थान पर केवल लकड़ी की बल्लियां लगाकर काम चलाना विभागीय कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था लकड़ी की बल्लियों के भरोसे चलानी पड़े, तो यह निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। जनता यह जानना चाहती है कि आखिर कब तक इस फ्लाईओवर की खामियों को नजरअंदाज किया जाएगा और कब स्थायी समाधान किया जाएगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन-प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटेगी।
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