@शब्द दूत ब्यूरो (29 मई 2026)
हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में संचालित मदरसों के सत्यापन अभियान में बड़ा खुलासा हुआ है। धामी सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन द्वारा कराए गए गहन सत्यापन में करीब 11 हजार बच्चों का रिकॉर्ड नहीं मिला है। आरोप है कि इन बच्चों के नाम पर मदरसा प्रबंधन सरकारी सुविधाओं और मिड डे मील का लाभ ले रहे थे।
जानकारी के अनुसार हरिद्वार जिले में मदरसा बोर्ड से पंजीकृत 131 मदरसे संचालित हो रहे थे। बोर्ड के रिकॉर्ड में इन मदरसों में लगभग 31 हजार बच्चों के अध्ययनरत होने का उल्लेख था। इन बच्चों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अल्पसंख्यक योजनाओं के तहत विभिन्न सुविधाएं, जिनमें मिड डे मील भी शामिल है, उपलब्ध कराई जा रही थीं।
राज्य सरकार को बच्चों की संख्या को लेकर संदेह होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिले में व्यापक सत्यापन अभियान चलाने के निर्देश दिए। इसके बाद जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के नेतृत्व में प्रशासन ने एक साथ कई मदरसों में जांच और सत्यापन अभियान शुरू किया।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि मात्र एक महीने के भीतर मदरसों में दर्ज बच्चों की संख्या 31 हजार से घटकर 19 हजार 400 रह गई है। कई मदरसों ने स्वयं संचालन बंद करने के लिए आवेदन भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन मदरसों में बच्चों की संख्या और मिड डे मील रिकॉर्ड में अंतर पाया गया है, उनके खिलाफ रिकवरी और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं उत्तराखंड अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि शासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि मदरसों में बच्चों की संख्या फर्जी तरीके से बढ़ाकर दिखाई जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच कराई गई, जिसमें हरिद्वार में शिकायतें सही पाई गईं। उन्होंने कहा कि अन्य जिलों में भी इसी प्रकार का सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है।
विशेष सचिव ने बताया कि जुलाई माह से पहले सभी मदरसों को नए पंजीकरण की प्रक्रिया से गुजरना होगा। जिन संस्थानों का पंजीकरण नहीं होगा, उन्हें बंद कराया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1 जुलाई से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत मदरसों सहित अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को राज्य शिक्षा बोर्ड के साथ-साथ नए प्राधिकरण से भी अनुमति लेनी होगी।
मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि राज्य सरकार “एक देश, एक शिक्षा” की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि सभी बच्चों को समान शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि मुस्लिम, सिख, ईसाई, पारसी, बौद्ध और जैन समुदायों के शिक्षण संस्थानों को भी सरकार की ओर से समान सहायता प्रदान की जाएगी।
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