@शब्द दूत ब्यूरो (28 मई 2026)
काशीपुर। डी बाली ग्रुप की डायरेक्टर एवं समाज सेविका श्रीमती उर्वशी दत्त बाली इन दिनों उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के भ्रमण पर हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ों की सादगी और आध्यात्मिक वातावरण को बेहद करीब से महसूस किया। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की हसीन वादियां वास्तव में धरती पर स्वर्ग का एहसास कराती हैं।
उन्होंने कहा कि लोग अक्सर स्विट्जरलैंड, लद्दाख और कश्मीर की खूबसूरती की चर्चा करते हैं, लेकिन उत्तराखंड भी प्राकृतिक सौंदर्य के मामले में किसी से कम नहीं है। काशीपुर से पिथौरागढ़ तक का सफर बेहद मनमोहक है, लेकिन असली जादू पिथौरागढ़ से गूंजी गांव की ओर बढ़ते ही शुरू होता है। उनका कहना है कि इस यात्रा में पिथौरागढ़ में एक रात अवश्य रुकना चाहिए, ताकि अगले दिन पहाड़ों की वास्तविक सुंदरता को आराम से महसूस किया जा सके।
उर्वशी दत्त बाली ने बताया कि पिथौरागढ़ से गूंजी तक जाते हुए हर मोड़ पर बदलते दृश्य किसी सपने जैसे प्रतीत होते हैं। कहीं सीधी काली सड़कें लद्दाख की याद दिलाती हैं, तो कहीं हरियाली और बहती नदियां कश्मीर का एहसास कराती हैं। वहीं बर्फ से ढकी चोटियां और घाटियां स्विट्जरलैंड जैसी अनुभूति देती हैं। रास्ते में गिरते विशाल झरने, बादलों से घिरे पहाड़ और दूर तक फैली हरियाली मन को बार-बार रुककर प्रकृति को निहारने के लिए मजबूर कर देती है। हल्की ठंडक में हर घंटे बाद चाय पीने का आनंद इस सफर को और खास बना देता है।
उन्होंने कहा कि एक रात पिथौरागढ़ में ठहरने के बाद उनका अगला पड़ाव खूबसूरत गूंजी गांव था, जहां पहुंचकर ऐसा महसूस होता है मानो धरती पर स्वर्ग यहीं बसा हो। उन्होंने सलाह दी कि गूंजी में कम से कम दो दिन अवश्य रुकना चाहिए। यहां एक ओर ओम पर्वत के दर्शन और दूसरी ओर आदि कैलाश की अद्भुत झलक श्रद्धालुओं को भगवान भोलेनाथ के और करीब होने का एहसास कराती है। मंदिरों की घंटियां, भोलेनाथ के जयकारे और श्रद्धा में डूबे भक्तों का वातावरण मन को भीतर तक शांति से भर देता है।
उन्होंने बताया कि वहां का तापमान 6 से 8 डिग्री के बीच था। शाम की हल्की बारिश और रातभर में बर्फ से ढकते पर्वत सुबह एक अलग ही दृश्य प्रस्तुत करते हैं। पिछली शाम जो पहाड़ अलग-अलग रंगों में दिखाई दे रहे थे, सुबह वे पूरी तरह सफेद चादर ओढ़े नजर आते हैं। ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने रातों-रात कोई चमत्कार कर दिया हो।
उर्वशी दत्त बाली ने कहा कि काली सड़कों के दोनों ओर फैली सफेद बर्फ किसी विदेशी फिल्म जैसा दृश्य प्रस्तुत करती है। बच्चों और युवाओं के लिए यह यात्रा किसी सपने से कम नहीं है। कहीं झरनों के बीच मस्ती, कहीं बर्फ में खेलना और हर पल को कैमरे में कैद करने की उत्सुकता इस सफर को यादगार बना देती है।
उन्होंने यात्रियों को सलाह देते हुए कहा कि इस यात्रा पर जाते समय छाता, पानी गर्म करने के लिए छोटी इलेक्ट्रिक केतली, गरम जैकेट, ऊनी जुराबें और घर के बने नाश्ते जैसे अचार, मठरी और बेसन के लड्डू जरूर साथ लेकर जाएं। उन्होंने कहा कि वहां के होमस्टे बेहद प्यारे हैं और गांव वालों का अपनापन इस सफर को और भी खास बना देता है। पहाड़ों के पारंपरिक भोजन का स्वाद अलग ही आनंद देता है, लेकिन अपने घर का अचार साथ हो तो यात्रा और भी यादगार लगती है।
उन्होंने गांव वालों की सादगी और मेहमाननवाजी की भी जमकर सराहना की। उनका कहना है कि सुबह हाथ में केतली लेकर गर्म चाय देना, बार-बार मुस्कुराकर भोजन के लिए बुलाना और बिना किसी दिखावे के पूरे दिल से मेहमाननवाजी करना पहाड़ों की सबसे बड़ी खूबसूरती है। ऐसा अपनापन अब शहरों में बहुत कम देखने को मिलता है।
उर्वशी दत्त बाली ने भावुक होकर कहा कि पूरे सफर के दौरान उनके मन में बस एक ही भावना बार-बार आती रही कि “भोलेनाथ ने इतने साल पहले क्यों नहीं बुलाया।” उन्होंने कहा कि वापसी के समय मन बिल्कुल नहीं करता कि इस जगह को छोड़कर लौटें। ऐसा लगता है जैसे हर महीने फिर उन्हीं पहाड़ों, उन्हीं बादलों और भोलेनाथ के चरणों में लौट जाएं।
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