@शब्द दूत ब्यूरो (19 मई 2026)
देहरादून। भारत मौसम विज्ञान विभाग, मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार उत्तराखंड में आगामी दिनों में तापमान में लगातार बढ़ोतरी होने की संभावना है। विशेष रूप से मैदानी जिलों—हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और देहरादून—में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच सकता है, जिससे भीषण गर्मी की स्थिति बन सकती है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र उत्तराखंड ने इसको लेकर सभी जनपदों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सके।
पूर्वानुमान के अनुसार 18 मई को हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और देहरादून में तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, चम्पावत और अल्मोड़ा में 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान रहने की संभावना है।
19 मई को हरिद्वार में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंचने का अनुमान है। वहीं ऊधम सिंह नगर, देहरादून, नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल में 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान रहने की संभावना जताई गई है। टिहरी गढ़वाल, अल्मोड़ा, चम्पावत और निचले चमोली क्षेत्रों में तापमान 30 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।
20 मई को भी हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में पारा 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहने की संभावना है। देहरादून, नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल में 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तथा टिहरी गढ़वाल, अल्मोड़ा, चम्पावत और निचले पर्वतीय क्षेत्रों में 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान रहने का पूर्वानुमान है।
21 और 22 मई को भी मैदानी क्षेत्रों में भीषण गर्मी का असर जारी रहने की आशंका है। हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रह सकता है, जबकि देहरादून, नैनीताल और पौड़ी गढ़वाल में 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तथा टिहरी गढ़वाल, अल्मोड़ा और चम्पावत में 30 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान रहने का अनुमान है।
SEOC ने सभी जनपदों को निर्देशित किया है कि आमजन को गर्मी से बचाव के लिए जागरूक किया जाए। लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से धूप में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग को हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अन्य गर्मी जनित बीमारियों से निपटने के लिए अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा पेयजल आपूर्ति और बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने, स्कूलों, निर्माण स्थलों और बाहरी कार्यों में लगे श्रमिकों के लिए विशेष एहतियात बरतने तथा बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों जैसे संवेदनशील वर्गों का विशेष ध्यान रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
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