@शब्द दूत ब्यूरो (09 मई 2026)
काशीपुर । निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि इलाज के नाम पर खुलेआम आर्थिक शोषण किया जा रहा है, वहीं सरकारी स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले में मूकदर्शक बना हुआ है। हालांकि अपवाद स्वरूप कुछ अस्पताल ईमानदारी और अपने चिकित्सकीय पेशे के प्रति जागरूक हैं।
शहर के कई निजी अस्पतालों में मरीजों को अनावश्यक जांचें लिखी जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि जब मरीज अस्पताल में ही टेस्ट करवाते हैं, तो उन्हें उनकी जांच रिपोर्ट स्पष्ट और पूर्ण रूप में उपलब्ध नहीं कराई जाती।
मरीजों का कहना है कि यह जानबूझकर किया जाता है, ताकि वे किसी अन्य डॉक्टर या अस्पताल से दूसरी राय (सेकंड ओपिनियन) न ले सकें।
कई अस्पतालों में इलाज और जांच की फीस पूरी तरह मनमानी बताई जा रही है। न तो कोई निर्धारित रेट लिस्ट सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाती है और न ही बिलिंग में पारदर्शिता देखने को मिलती है। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि एक ही जांच के लिए अलग-अलग मरीजों से अलग-अलग रकम वसूली जाती है।
गंभीर स्थिति में पहुंचे मरीजों के परिजन अक्सर जल्द इलाज के दबाव में होते हैं। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर अस्पताल प्रबंधन उनसे मोटी रकम वसूलते हैं। कई मामलों में मरीज को भर्ती करने से पहले ही भारी एडवांस जमा कराने का दबाव बनाया जाता है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग उत्तराखंड की भूमिका पर उठ रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त जांच और कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े नियमों के अनुसार, किसी भी मरीज को उसकी मेडिकल रिपोर्ट देने से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही अस्पतालों को अपनी सेवाओं की दरें सार्वजनिक करनी होती हैं। लेकिन काशीपुर के कई अस्पताल इन नियमों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रथाएं न केवल मरीजों के अधिकारों का उल्लंघन हैं, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं।
देखा जाये तो निजी अस्पतालों की नियमित जांच और ऑडिट
रेट लिस्ट और बिलिंग में पारदर्शिता अनिवार्य होती है। पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सिर्फ शिकायत का इंतजार करते हैं या फिर किसी मरीज के साथ अनहोनी की प्रतीक्षा करते हैं।
काशीपुर में निजी अस्पतालों द्वारा कथित लूट और मनमानी की शिकायतें गंभीर हैं। यदि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने जल्द सख्त कदम नहीं उठाए, तो आम जनता का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था से पूरी तरह उठ सकता है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी कब जागते हैं और इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई होती है।
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