@शब्द दूत ब्यूरो (04 फरवरी 2026)
देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा
और ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए धामी सरकार ने राज्य के मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया है। आगामी शिक्षा सत्र जुलाई से राज्य में “मदरसा” नाम से कोई भी शिक्षण संस्था संचालित नहीं हो सकेगी। अब सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अधीन होंगे।
सरकार के इस फैसले के बाद अल्पसंख्यक समुदाय के सभी शिक्षण संस्थानों को उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेना अनिवार्य होगा और प्राधिकरण द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार ही पढ़ाई करानी होगी।
क्यों लिया धामी सरकार ने यह फैसला
धामी सरकार ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि राज्य में सैकड़ों मदरसे बिना सरकारी अनुमति के संचालित पाए गए थे। जांच में सामने आया कि कई मदरसों में बाहरी राज्यों से बच्चों को लाकर पढ़ाया जा रहा था। हरिद्वार जिले में ऐसे मामले सामने आए जहां हिंदू बच्चे भी इस्लाम की मजहबी शिक्षा लेते पाए गए, जिस पर राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने संज्ञान लिया था।
सरकार ने कार्रवाई करते हुए 227 अवैध मदरसों को बंद कर उनकी तालाबंदी कराई। फंडिंग और संचालकों के सत्यापन में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय लिया।
उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन
धामी सरकार ने 12 सदस्यीय उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन कर दिया है। इसके अध्यक्ष अर्थशास्त्री प्रोफेसर सुरजीत सिंह गांधी को बनाया गया है। प्राधिकरण में मुस्लिम, सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध समुदायों के शिक्षाविदों और समाजसेवियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। अल्पसंख्यक एवं शिक्षा विभाग के तीन पदेन सदस्य भी इसमें शामिल हैं।
क्या कहते हैं विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते
अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते के अनुसार प्राधिकरण का मुख्य कार्य अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम तय करना है। यदि धार्मिक शिक्षा दी जानी है तो उसकी सीमा और स्वरूप भी प्राधिकरण ही निर्धारित करेगा। शेष पाठ्यक्रम उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड का होगा।
मुस्लिम नेताओं ने फैसले का किया स्वागत
मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष शमूम कासमी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम से अल्पसंख्यक बच्चे मुख्यधारा से जुड़ेंगे।
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने इसे यूसीसी और ट्रिपल तलाक कानून के बाद धामी सरकार का ऐतिहासिक निर्णय बताया। वहीं अल्पसंख्यक आयोग की उपाध्यक्ष फरजाना बेगम ने कहा कि इससे बच्चों को देश-विदेश में रोजगार और कारोबार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का तर्क
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि मदरसों में क्या पढ़ाया जा रहा है, कौन पढ़ा रहा है और फंडिंग कहां से हो रही है। जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में अब अवैध मदरसे नहीं चलेंगे और अल्पसंख्यक बच्चों को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के माध्यम से आधुनिक शिक्षा दी जाएगी। अब अल्पसंख्यक की परिभाषा में केवल मुस्लिम नहीं बल्कि जैन, सिख, ईसाई, पारसी सहित सभी समुदायों को समान अवसर मिलेंगे।
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