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विपक्ष के हंगामे के बीच उत्तराखंड विधानसभा ने उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2025 तथाअल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक पारित, जानिये क्या है प्रावधान?

@शब्द दूत ब्यूरो (20 अगस्त 2025)

देहरादून। विपक्ष के हंगामे के बीच उत्तराखंड विधानसभा ने उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम, 2025 तथा

अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक पारित कर दिए। सरकार ने अनुपूरक बजट सहित अन्य विधेयक भी चर्चा के लिए रख कर एक के बाद एक पारित करवाए।

सदन की कार्यवाही: प्रस्ताव और पारित होने की प्रक्रिया

  • धर्मांतरण विधेयक का प्रस्ताव धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने सदन के समक्ष रखा।
  • अल्पसंख्यक शिक्षा से जुड़ा मदरसा बोर्ड समाप्त करने का प्रस्ताव संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने रखा।
  • सत्ता पक्ष ने बहुमत के आधार पर “हां” कहकर दोनों विधेयकों को पारित कराया, जबकि विपक्ष शोर-शराबा करता रहा।

धर्मांतरण संशोधन विधेयक 2025: क्या बदला?

  • तुरंत प्रभाव: अधिनियम तुरंत प्रवृत्त होगा।
  • प्रलोभन की विस्तृत परिभाषा: उपहार/धन, नौकरी, धार्मिक संस्थान में नि:शुल्क शिक्षा, विवाह का वचन, बेहतर जीवनशैली का लालच, दैवीय अप्रसन्नता का भय, किसी धर्म/रीति को दूसरे के विरोध में हानिकारक तरीके से चित्रित करना, या अन्य धर्म के विरुद्ध महिमामंडन—सभी प्रलोभन माने जाएंगे।
  • डिजिटल ढंग शामिल: सोशल मीडिया/ऐप/नेटवर्किंग साइट्स आदि से बहलाना, उकसाना या षड्यंत्र करना अपराध।
  • छद्म पहचान (Fraudulent Impersonation): धार्मिक वेशभूषा/पहचान का दुरुपयोग, झूठी सामाजिक/धार्मिक पहचान, जनता को भ्रमित कर अनुचित लाभ लेना—दंडनीय।
  • सार्वजनिक भावना की सुरक्षा: समुदायों की सांस्कृतिक-धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने पर कार्रवाई।
  • सूचना की प्रक्रिया: उल्लंघन की सूचना नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के अध्याय 13 के अनुरूप।

सजा और जुर्माना

  • सामान्य उल्लंघन: 3–10 वर्ष कारावास + ₹50,000 से कम नहीं जुर्माना।
  • नाबालिग/महिला/एससी-एसटी/दिव्यांग: 5–14 वर्ष + ₹1,00,000 से कम नहीं।
  • सामूहिक धर्मांतरण: 7–14 वर्ष + ₹1,00,000 से कम नहीं।
  • विदेशी/अवैध फंडिंग: 7–14 वर्ष + ₹10,00,000 से कम नहीं।
  • विवाह हेतु धर्म छिपाना: 3–10 वर्ष + ₹3,00,000 से कम नहीं।
  • धमकी/हमला/तस्करी सहित गंभीर कृत्य: 20 वर्ष तक (आजीवन तक बढ़ाया जा सकने वाला) कठोर कारावास + उपयुक्त जुर्माना।

प्रक्रियात्मक प्रावधान

  • अपराध संज्ञेय व गैर-जमानती, विचारण सत्र न्यायालय में।
  • जमानत पर सख्त शर्तें; लोक अभियोजक को सुनवाई का अवसर।
  • पीड़ित मुआवजा: अधिकतम ₹5,00,000 तक प्रतिकर—जुर्माने से अलग।
  • संपत्ति कुर्की: डीएम अवैध अर्जित संपत्ति कुर्क कर सकेंगे; प्रशासक नियुक्ति का प्रावधान।
  • पीड़ित अधिकार: संरक्षण, यात्रा/भरण-पोषण व्यय, सामाजिक-आर्थिक पुनर्वास, पहचान गोपनीयता।

अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक: USAME का गठन

  • प्राधिकरण (USAME): एक अध्यक्ष + 11 सदस्य; अध्यक्ष अल्पसंख्यक समुदाय का अनुभवी शिक्षाविद (15+ वर्ष अनुभव)।
  • मदरसा बोर्ड समाप्त: 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2016 तथा अरबी-फारसी मदरसा मान्यता विनियमावली, 2019 निरस्त मानी जाएंगी।
  • नई मान्यता: 2026–27 शैक्षणिक सत्र से मदरसों को धार्मिक शिक्षा हेतु प्राधिकरण से पुनर्मान्यता आवश्यक।
  • मान्यता की मुख्य शर्तें: संस्थान अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित/संचालित; पंजीकृत निकाय द्वारा प्रबंधन; परिषद से संबद्ध; गैर-अल्पसंख्यक नामांकन ≤ 15%
  • पाठ्यक्रम व मूल्यांकन: धर्म/भाषा विषयों का पाठ्यक्रम; परीक्षाओं, मूल्यांकन और प्रमाण-पत्र के लिए दिशानिर्देश।
  • विस्तृत दायरा: सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, मुस्लिम, पारसी समुदायों के संस्थान शामिल—सभी के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा।
  • उद्देश्य: अल्पसंख्यक बच्चों को विद्यालयी शिक्षा परिषद के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ना और गुणवत्ता/पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
सीएम धामी ने सदन में कहा –

> “उत्तराखंड में धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून जरूरी था। प्रलोभन, धोखे या लव जिहाद जैसे मामलों पर अब रोक लगेगी। यह अधिनियम समाज की सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान बचाने की दिशा में ठोस कदम है।”

 

उन्होंने आगे कहा –

> “अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक से अब केवल मुस्लिम मदरसों तक सीमित व्यवस्था नहीं होगी। सभी अल्पसंख्यक समुदायों को शिक्षा के बराबरी के अधिकार मिलेंगे। यह कदम अल्पसंख्यक बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में मदद करेगा।”

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