@शब्द दूत ब्यूरो (27 जून 2025)
श्रीनगर। आगामी 3 जुलाई से शुरू होने जा रही अमरनाथ यात्रा पर 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का स्पष्ट असर दिखाई देने लगा है। बीते वर्ष जहां 2.36 लाख श्रद्धालुओं ने यात्रा के लिए पंजीकरण कराया था, वहीं इस बार अब तक केवल 85,000 श्रद्धालुओं ने ही अपनी उपस्थिति की पुष्टि की है।
सुरक्षा एजेंसियों ने यात्रा मार्गों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत कर दिया है। दोनों प्रमुख मार्गों — पहलगाम और बालटाल — पर तीन स्तरीय सुरक्षा घेरा तैनात किया गया है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षाबल की तैनाती की गई है, वहीं ड्रोन से निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस भी बढ़ाया गया है।
इस बार हेलीकॉप्टर सेवा पर रोक लगाई गई है, ताकि जमीन से ही हर श्रद्धालु की निगरानी और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। साथ ही दोनों यात्रा मार्गों को चौड़ा किया गया है ताकि आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।
प्रशासन श्रद्धालुओं को आश्वस्त कर रहा है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और यात्रा को निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए हर संभव प्रयास जारी हैं। फिर भी हमले की आशंका और डर ने पंजीकरण संख्या में भारी गिरावट ला दी है।
सरकार और श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ओर से अपील की गई है कि श्रद्धालु अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बीते रोज कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के कुछ ही महीनों बाद होने वाली अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन में गिरावट देखी गई है। एलजी ने कहा कि इस साल की अमरनाथ यात्रियों की संख्या में गिरवाट का सीधा कनेक्शन पहगलाम अटैक से है।
एलजी ने कहा, इससे पहले 2.36 लाख से अधिक यात्रियों ने यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। लेकिन इस बार अब तक महज 85,000 ने अपने रजिस्ट्रेशन की पुष्टि की है। उन्होंने कहा, अगर देखा जाए तो इससे पिछले साल के मुकाबले में इस बार रजिस्ट्रेशन में 10.19 प्रतिशत की गिरावट आएगी।
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