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काशीपुर :लगभग 40000 लोगों का संगठन, पदाधिकारी चुनेंगे केवल 766 मतदाता, देवभूमि पर्वतीय महासभा को लेकर उठने लगे हैं सवाल?क्या कोई नया संगठन हो रहा तैयार?

@शब्द दूत ब्यूरो (21 अगस्त 2024)

काशीपुर । शहर के लगभग 40000 पर्वतीय जनसंख्या के साथ संगठन के नाम पर मजाक चल रहा है। कुछ लोगों ने इस संगठन को जेबी संगठन बना दिया है। इसका जीता जागता प्रमाण है संगठन की सदस्य संख्या जो कि वर्तमान में चल रही चुनावी प्रक्रिया में मत देने जा रहे हैं।

हम बात कर रहे हैं देवभूमि पर्वतीय महासभा की । पिछले कई सालों से यह संस्था काशीपुर में पर्वतीय लोगों का संगठन कही जाती है। दावा है कि ये 40000 के लगभग लोगों का संगठन है। पर प्रामाणिक रूप से यह संस्था मात्र 766 लोगों का ही संगठन है। ये अलग बात है कि इन 766 से ज्यादा लोग विभिन्न कार्यक्रमों और आयोजनों के लिए चंदा दिया करते हैं।

इन 766 लोगों में भी विवाद की स्थिति उत्पन्न होने के बाद आज प्रशासन को इसमें हस्तक्षेप कर चुनाव प्रक्रिया संपन्न करानी पड़ रही है। अब सवाल उठ रहे हैं कि लगभग 40000 लोगों के इस संगठन में मात्र 766 लोगों में से ही पदाधिकारी चुने जाने से आप इसे पूरे पर्वतीय समाज का संगठन कैसे कह सकते हैं?

सवाल तो यह भी है कि कार्यक्रमों के रसीद बुक लेकर चंदा इकट्ठा करने तो लोग निकलते हैं लेकिन क्या कभी संगठन की सदस्यता के लिए भी संगठन के पदाधिकारियों ने रसीद बुक लेकर संपर्क किया है? आखिर सदस्यता बढ़ाने पर जोर क्यों नहीं दिया गया? क्या कुछ लोग अपनी मोनोपोली चलाने के उद्देश्य से संस्था की सदस्य संख्या बढ़ाने से बचते आये हैं?

अब जब देवभूमि पर्वतीय महासभा की सदस्य संख्या का खुलासा हुआ है तो लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश देखने में आ रहा है। हर बार की तरह इस बार भी चुनाव में चंद गिने चुने चेहरे ही दिखाई देंगे। हालांकि प्रशासन के पास जितनी सदस्य संख्या है वह उसी के अनुसार चुनावी प्रक्रिया संपन्न करायेगा। ये अलग बात है कि अनेक ऐसे प्रतिभाशाली लोग जो समाज और संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं इस चुनाव में भाग नहीं ले पायेंगे। एक बार फिर यह संगठन कुछ लोगों की जेबी संस्था बन कर रह जायेगा। और संवैधानिक रूप से प्रशासन की देखरेख में चुनाव प्रक्रिया होने से इसकी वैधता पर कोई सवाल नहीं उठ सकता।

लेकिन फिर वही बात कि संगठन के नाम पर मात्र कुछ लोग ही पर्वतीय संगठन में अपनी भागीदारी निभा पायेंगे। इधर इस इस सबके चलते चर्चा इस बात की भी शुरू हो गई कि एक नया संगठन बनाया जाये जिसमें पहले अधिक से अधिक पर्वतीय लोगों को सदस्य बनाकर एक मजबूत संगठन तैयार किया जाये जिसमें हर किसी को अपन भूमिका निभाने का अवसर मिल सके।

हालांकि इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक प्रक्रिया पर कोई सवाल नहीं उठता क्योंकि वह नियमानुसार इस प्रक्रिया को संपन्न कराने जा रहा है।

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