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जनादेश की द्रोपदी का चीरहरण@एक्जैक्ट पोल से पहले एक्जिट पोल

राकेश अचल,
वरिष्ठ पत्रकार जाने माने आलोचक

अठारहवीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में जनादेश आने से पहले गोदी मीडिया के तमाम चैनलों और अखबारों के एक्जिट पोल द्वारा भाजपा गठबंधन की सरकार बनाई जा चुकी है। नयी सरकार को कायदे से आज ही पेशगी बधाई दे देना चाहिए, लेकिन मै गोदी मीडिया की तरह जनादेश की द्रोपदी का चीरहरण नहीं करना चाहता ,इसलिए नयी सरकार को बधाई 4 जून की दोपहर के बाद ही दूंगा। अब सवाल ये है कि गोदी मीडिया ने जनादेश की प्रतीक्षा किये बिना मोदी की सरकार बनवाने में उतावलेपन का जो मुजाहिरा [ आप मुजरा भी कह सकते हैं ] किया है उसके लिए उसे कितनी कीमत मिली ? या उसकी कीमत कौन चुकाएगा ?

जब एक्जिट पोल से ही सरकारें बनने लगीं हैं तो मतगणना की औपचारिकता कराने की क्या आवश्यकता है ? भाजपा ने सत्ता में रहते हुए हैट्रिक लगाने के इतने पुख्ता इंतजाम कर ही लिए थे तो फिर चुनावों पर इतना खर्च करने की जरूरत भी क्या थी ? केंचुआ उनका था, है। ,ईवीएम उनकी है और मीडिया उनका है ही। एक्जिट पोल दरअसल 4 जून को पहले से रचे गए कथित झूठ के नाटक की ताईद करने की एक निकृष्ट कोशिश है। देश में जब निशियाम बकबक करने वाले टीवी चैनल नहीं हुआ करते थे तब हम भी अखबारों के लिए सम्भावनाएँ तलाशने के लिए तमाम पापड़ बेलते थे ,और आप यकीन कीजिये की हमारे अनुमान भी सटीक ही बैठते थे लेकिन हम और हमारी पीढ़ी के पत्रकारों ने कभी भी जनादेश से पहले किसी पार्टी की सरकार नहीं बनवाई। न किसी दल के लिए लाल गलीचे नहीं बिछाए।

जगजाहिर है कि देश में पहली बार चुनाव प्रचार की रेल मुद्दों की पटरी से परे दौड़ाने की कोशिश की गयी। सरकार की उपलब्धियों के बजाय विपक्ष की खामियों पर चुनाव लड़ने की कोशिश की गयी। उपलब्धियां गिनाने के बजाए विपक्ष के ऐब गिनाये गये । मुद्दों पर धूल’ डालकर उनकी जगह ‘ हौवे ‘ खड़े किये गए। कभी मंगलसूत्र खतरे में डाला गया तो कभी सनातन को । कभी हिन्दू -मुसलमान किया गया तो कभी अल्संख्यकों के आरक्षण को पिछड़ों के आरक्षण पर डकैती बताया गया तो कभी विरासत और भैंस तक को बीच में लाया गय। चुनाव प्रचार का समापन मुसलमानों के सामने विपक्ष के कथित मुजरे से हुआ। आदर्श आचार संहिता का पहरेदार केंचुआ आँखें नटेर कर सब कुछ देखता रहा। और वो सब कुछ हुआ जो नहीं होना चाहिए था।

इस आम चुनाव में गरीबी ,मंहगाई ,बेरोजगारी और तो और एक जाति विशेष की अस्मिता का मामला भी यदि जनता की समझ में नहीं आया तो समझ लीजिये की जनता की आँखों में जो रतौंधी दस साल पहले पैदा की गयी थी वो अब अंधत्व में बदल चुकी है। जनता के मताधिकार से अब कोई तब्दीली नहीं हो सकती। हमारा जन प्रतिनिधित्व क़ानून अब एक ढकोसला बनकर रह गया है। हमारे पास जनता का गुस्सा प्रकट करने का कोई हथियार नहीं बचा है । मताधिकार हो या जनादेश या केंचुआ सभी पर सत्ता प्रतिष्ठान का नियंत्रण है। ताउम्र सत्ता में बने रहने की ललक है ,लिप्सा है। ये चुनाव किसी सरकार का नहीं बल्कि इस बात का फैसला करेगा कि जनता अपने मताधिकार से वंचित की जा चुकी है या नहीं ? ये जनादेश सत्ता प्रतिष्ठान की साजिशों,मूर्खताओं और सियासत में अदावत का जहर घोलने के पक्ष में है या खिलाफ ? फैसला जनता को करना है लेकिन लगता है कि ये फैसला भी सत्ता प्रतिष्ठान ने अपने हाथों में ले लिया है। जनता फिर एक बार ठगी जाने वाली है मदारियों के हाथों।

चूंकि मैंने खुद तो चुनाव लड़ा नहीं है इसलिए एक्जिट पोल देखने के बाद मेरा कोई जाती नुक्सान तो होने से रहा,लेकिन जो नुक्सान देश का और जनता का होने वाला है उसकी कल्पना से मेरे मन में हल्की सी सिहरन जरूर है। देश आपातकाल के काले बादलों से 19 महीने में मुक्ति पा गया था लेकिन लगता है कि अब उसे अमर्यादित और कुंठित राजनीति के काले बादलों से मुक्ति के लिए अभी और प्रतीक्षा करना पड़ेगी। दुर्दिन कभी स्थाई नहीं होते । उनकी उम्र लम्बी जरूर हो सकती है। जनता यदि अपने मताधिकार के जरिये तबे पर जलती रोटी को नहीं पलट सकती तो उनके नसीब में जली रोटी ही लिखी है ये मानकर चलना चाहिए। मानकर चलना चाहिए कि उसके नसीब में तड़ीपार,बटमार और टपोरी नेतृत्व ही लिखा है। यहाँ मैं कवि प्रदीप की इस बात से बिलकुल सहमत नहीं हूँ कि –
कोई लाख करे चतुराई ,
करम का लेख मिटे ना रे भाई ‘
करम [किस्मत ] का लेख ,सुलेख ,आलेख सब मिटाये जा रहे हैं , ‘ कान्सप्रेसी थ्योरी ‘ के जरिये । इलेक्टोरल बांड से मिले पैसे के जरिये। किस्मत अब पत्थर की लकीर नहीं ,बल्कि रेत पर लिखी इबारत जैसी है। बहरहाल आप और हम सभी मिलकर एक्जिट पोल का आनंद लें और ‘स्क्रिपिटेड जनादेश की प्रतीक्षा करें । जो हो उसे शिरोधार्य करने की तैयारी करें । भाजपा ने तो जनादेश आने के पहले ही 9 जून को कर्तव्य पथ पर माननीय मोदी जी के शपथ ग्रहण की तयारी कर ली है और राहुल गांधी का अमेरिका यात्रा का टिकिट कटवाकर वायरल करा दिया है।
@ राकेश अचल
achalrakesh1959@gmail.com

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