@शब्द दूत ब्यूरो (13 फरवरी, 2024)
वैज्ञानिक संस्थानों ने चेताया है कि उत्तराखंड की 13 ग्लेशियर झीलें खतरे का सबब बन सकती हैं। क्योंकि इन झीलों का फैलाव तेजी से बढ़ रहा है, जो भविष्य में केदारनाथ आपदा जैसे बड़े नुकसान का सबब बन सकता है। इनकी निगरानी के लिए सरकार ने एक विशेषज्ञ टीम का गठन किया है, जिसकी रिपोर्ट केंद्र को भेजकर जोखिम से बचाव का मार्गदर्शन लिया जाएगा।
सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा ने विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के साथ इन 13 ग्लेशियर झीलों की समीक्षा के बाद कहा कि वाडिया इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों द्वारा गंगोत्री ग्लेशियर की निगरानी की जा रही है। गंगोत्री ग्लेशियर के साथ बहुत सी झीलें हैं, जिनपर खतरा मंडरा है। इसी प्रकार, बसुधारा ताल में भी जोखिम लगातार बढ़ रहा है, जिसकी निगरानी वाडिया संस्थान कर रहा है।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग के वैज्ञानिकों के मुताबिक भागीरथी, मंदाकिनी, अलकनंदा नदियों के निकट ग्लेशियर झीलों की निगरानी की जा रही है। जिसमें पाया गया कि केदारताल, भिलंगना व गौरीगंगा ग्लेशियर का क्षेत्र निरंतर बढ़ता जा रहा है। जो आने वाले समय में आपदा के जोखिम के प्रति संवेदनशील है।
सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा के मुताबिक ग्लेशियरों की निगरानी के लिए एक बहुक्षेत्रीय विशेषज्ञ टीम गठित की जाएगी। जिसमें उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण नोडल विभाग के रूप में काम करेगा। यह ग्लेशियर झीलों का अध्ययन करेगी और इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। केंद्र से मार्गदर्शन प्राप्त किया जाएगा कि ग्लेशियर झीलों से पैदा होने वाली आपदाओं का प्रभावी नियंत्रण कैसे हो।
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