@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (27 मई, 2022)
कांग्रेस छोड़ चुके कपिल सिब्बल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर राज्यसभा चुनाव लडऩे के लिए समर्थन की खातिर सबसे पहले बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का दरवाजा खटखटाया था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ममता ने सिब्बल को साफ तौर पर कह दिया था कि उन्हें पहले उनकी पार्टी ज्वाइन करनी होगी, तभी राज्यसभा चुनाव में उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया जाएगा। सिब्बल ने इस शर्त को मानने से इन्कार कर दिया था और वहां से उत्तर प्रदेश का रुख किया था। वे अब समाजवादी पार्टी के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर रास चुनाव लड़ेंगे।
गौरतलब है कि सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में बंगाल सरकार के अधिवक्ताओं के पैनल के प्रमुख सदस्य हैं और कई महत्वपूर्ण मामलों में पैरवी कर चुके हैं। उन्होंने गाय तस्करी कांड से जुड़े एक मामले में अभिषेक आर उनकी पत्नी रुजिरा की भी पैरवी की थी।
जानकारी के मुताबिक सिब्बल ने इसे लेकर टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से भी बातचीत की थी लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद उन्होंने सपा नेता अखिलेश यादव से मुलाकात की। अखिलेश ने उनका समर्थन करने की बात कही है। इसके लिए उन्हें सपा में शामिल नहीं होना पड़ेगा।
सूत्रों का कहना है कि टीएमसी सिब्बल को अपने खेमे में लेकर कांग्रेस को एक और झटका देना चाहती थी लेकिन सिब्बल इसके लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने टीएमसी नेतृत्व को कहा कि वे स्वतंत्र तौर पर विभिन्न मसलों पर रास में आवाज उठाना चाहते हैं। ममता को यह रास नहीं आया।
गौरतलब है कि सिब्बल को ना कहने पर भी टीएमसी ने कुछ साल पहले रास चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अभिषेक मनु सिंघवी का समर्थन किया था, हालांकि उस वक्त टीएमसी-कांग्रेस के रिश्ते आज जितने कड़वे नहीं थे और सिंघवी के साथ ममता के काफी अच्छे संबंध भी हैं। इससे पहले शत्रुघ्न सिन्हा के टीएमसी में शामिल होने के बाद ही ममता ने उन्हें आसनसोल लोकसभा सीट से उपचुनाव के लिए टिकट दिया था।
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