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“सलहज तो हो गयी असहज किसे लगाएं अबीर मातृभूमि के लिए हुए शहीद नंदोई महावीर”फागोत्सव में कवियों ने बिखेरे कविताओं के रंग

किसी की प्यास देखूँ तो मुझे दरिया बना देना।
मुझे हर जन्म में मेरे बिटिया बना देना।।

@रामशंकर भारती

झाँसी(12 मार्च 2022) । मंडलायुक्त डा. अजय शंकर पाण्डेय के मार्गदर्शन में बनी ‘ बुंदेलखण्ड साहित्य उन्नयन समिति ‘ की आवश्यक बैठक बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय झाँसी के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष एवं बुंदेलखण्ड साहित्य उन्नयन समिति के अध्यक्ष डा.पुनीत बिसारिया की अध्यक्षता तथा समिति के संरक्षक संयुक्त शिक्षा निदेशक के नोडल अधिकारी डा अनुरुद्ध रावत के मार्गदर्शन में बुंदेलखण्ड विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में सपन्न हुई।

बैठक में समिति के अध्यक्ष डा.पुनीत बिसारिया ने आगामी 24 , 25 एवं 26 मार्च 2022 को आयोजित होने वाले ‘ बुंदेलखण्ड साहित्य महोत्सव ‘ की विभिन्न प्रकार की व्यवस्थाओं यथा मंच , आवास , भोजन , यातायात , पुस्तक स्टाल , कार्यक्रम संचालन आदि पर विस्तार से चर्चा करते हुए समिति के सदस्यों को व्यवस्थाओं को आवंटित करके उत्तम व्यवस्था करने के लिए प्रेरित किया। वहीं समिति के संरक्षक डा.अनुरुद्ध रावत ने बुंदेलखण्ड साहित्य उन्नयन समिति की निरंतर रचनात्मक सक्रियता के लिए समिति के अध्यक्ष डा.पुनीत बिसारिया जी को उनके कुशल
नेतृत्व के लिए साधुवाद दिया। इस अवसर पर बुंदेलखण्ड पर्यटन समिति के अध्यक्ष डा. प्रदीप तिवारी तथा डा. नवीन पटेल ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

बैठक के पश्चात लोकभूषण पन्ना लाल असर के सफल संयोजन में बुंदेली फागोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें बुंदेली के कवियों और कवयित्रियों ने अपनी उत्कृष्ट बुंदेली रचनाओं का सुंदर पाठ किया। फागोत्सव का शुभारंभ करते हुए जानेमाने कवि साकेत सुमन चतुर्वेदी ने अपनी यह बुंदेली रचना पढ़ी –
मौं पै रंग न डारौ सँबरिया
मोरी भींग जै चुनरिया
वहीं निहालचंद्र शिवहरे ने मातृ भूमि के लिए शहीद हुए सैनिक की पत्नी की पीड़ाओं को इन पंक्तियों में व्यक्त किया

सलहज तो हो गयी असहज किसे लगाएं अबीर
मातृभूमि के लिए हुए शहीद नंदोई महावीर।
डा.रामशंकर भारती ने होली को कुछ इस तरह याद किया –
तुम हो तो होली है
हँसी रंग ठिठोली है।।

कवयित्री सुमन मिश्रा ने वसंत को निमंत्रण देते हुए गीत पढ़ा –
टेसू के फूल खिले वसंत हुआ पाहुना
रजनी भी करे आज दिनकर की कामना।
वहीं मोनिका पाण्डेय के ये पंक्तियाँ भी पसंद की गयीं –

किसी की प्यास देखूँ तो मुझे दरिया बना देना।
मुझे हर जन्म में मेरे बिटिया बना देना।।

युवा कवि वैभव दुबे ने दिल से दिल मिलाने वाला सुंदर गीत पढ़ा –
दिल से दिल यों मिल गये धड़कन रंगोली हो गयी।
साँसों की गति अनगिनत फूलों की टोली हो गयी।।

फिल्म अभिनेता आरिफ शहडोली ने पढ़ा –
.. चोंच दयी है तौ चुनु भी दै है।”

सुखराम चतुर्वेदी फौजी ने भोर का चित्र खींचते हुए कहा-
बिटुआ हो गई भोर गगन में
डूबन लगीं तरैंया।

ओम प्रकाश मिश्रा ने अपनी वैचारिक रचना ” मैं सूखा मरुस्थल हूँ ” पढ़ी।
छात्र कवि कुशराज ने अपनी प्रेरणादायक रचना यों पढ़ी – चाहै हों दिव्यांगजन , सब जन समान हो।।
छात्रा समीक्षा ने अत्यंत मार्मिक कविता पढ़ी –

माँ ! वो मुझे चाकलेट के बहाने बंद कमरे में ले गया..

वहीं पुष्पेन्द्र ने अपनी वीर रस की रचना “मैं झाँसी लिखूँ ”
पढ़कर सभी को तालियाँ बजने पर मजबूर कर दिया।

बुंदेली फागोत्सव के सूत्रधार लोकभूषण पन्ना लाल असर ने अपनी रंगभरी चौकड़ियों व फागों सें फागुन को देहरी पर उतारते हुए समारोह को एक नई ऊर्जा से भर दिया । उनकी चेतावनी की पंक्तियाँ देखिए –

मत करियो गुमान , मत करियो गुमान
नहिंया भरोसौ जिंदगानी कौ।।
इस अवसर पर डा.मुहम्मद नईम , डा. अजय गुप्ता , प्रदीप कुमार पाण्डेय , ज्योति प्रकाश खरे , अशोक मिश्रा आदि उपस्थित रहे।

बैठक व फागोत्सव समारोह के मिलेजुले कार्यक्रम का सफल संचालन लोकभूषण पन्ना लाल असर ने किया। बुंदेलखण्ड साहित्य उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष निहालचंद्र शिवहरे ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

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