@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (12 मार्च, 2022)
इस बार उत्तर प्रदेश चुनाव में भले ही महिलाओं की भूमिका और नई सरकार तय करने को लेकर काफी चर्चा रही हो, लेकिन नई विधानसभा में उनकी नुमाइंदगी निराश करने वाली है। यूपी में 45 फीसदी महिला मतदाता होने के बावजूद चुनाव में महिलाओं की भागीदारी पिछली बार की तरह 42 पर अटक गई है।
चिंताजनक बात है कि इनमें से ज्यादातर महिला विधायक वो हैं, जो पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। महिला विधायकों में सबसे चर्चित नाम अपना दल कमेरावादी की प्रत्याशी पल्लवी पटेल का है, जिन्होंने योगी सरकार में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को हराकर धमाका किया। पल्लवी पटेल की बहन अनुप्रिया पटेल बीजेपी की केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
कांग्रेस की एकमात्र महिला विधायक आराधना मिश्रा मोना ने बीजेपी के नागेश प्रताप को हराया। अराधना कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं और उनके खिलाफ सपा ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था। कल्याणपुर से नीलिमा कटियार ने सपा प्रत्याशी सतीश गौतम को हराकर चुनाव जीता। उनकी मां प्रेमलता कटियार चार बार विधायक और बीजेपी सरकार में मंत्री रही हैं।
आगरा रूरल से बीजेपी का दलित चेहरा और पूर्व राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने 76 हजार वोटों से चुनाव जीता। उन्होंने बीएसपी की किरन प्रभा केसरी को हराया। चुनाव आयोग के 2020 में आए इलेक्टोरल रोल के डेटा के मुताबिक, यूपी में 14.51 करोड़ मतदाता हैं. इनमें से 7.85 करोड़ पुरुष और 6.66 करोड़ महिलाएं हैं।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal