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काशीपुर :13 अक्टूबर को महाराजा अग्रसेन महाराज की शोभायात्रा से पूर्व छलका वैश्य समाज का दर्द,वैश्य समाज की स्थिति एससी-एसटी से भी बदतर, एकजुटता से ही मिलेगी ताकत: योगेश जिंदल, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (12 अक्टूबर 2026)

काशीपुर। कुमाऊं वैश्य महासभा की ओर से 13 अक्टूबर को शाम पांच बजे मौ किला से महाराजा अग्रसेन जी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शोभायात्रा की तैयारियों और वैश्य समाज की एकता, सामाजिक सरोकारों तथा वर्तमान परिस्थितियों पर चर्चा करने के लिए आज रामलीला मैदान के सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में महासभा के संरक्षक एवं प्रसिद्ध उद्योगपति योगेश जिंदल ने समाज के प्रति शासन के रवैये पर अपनी पीड़ा व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में वैश्य समाज की स्थिति एससी-एसटी वर्ग से भी बदतर हो गई है। समाज के बच्चों को सरकारी नौकरियों में अवसर प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्य समाज संख्या, आर्थिक सामर्थ्य और सामाजिक योगदान के बावजूद संगठित नहीं है, जबकि एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।

योगेश जिंदल ने कहा कि नवरात्र के पावन अवसर पर महाराजा अग्रसेन जी की शोभायात्रा केवल एक धार्मिक या सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को एकता, समानता, परोपकार और नैतिकता का संदेश देने का माध्यम है। उन्होंने समस्त वैश्य समाज से शोभायात्रा में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि समाज के विभिन्न घटकों और संस्थाओं को एक मंच पर लाकर नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाना और समाज को नई दिशा देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पिछले पांच-छह वर्षों में विभिन्न परिस्थितियों के कारण वैश्य समाज अनेक घटकों में बंटा हुआ है। कुमाऊं वैश्य महासभा का उद्देश्य इन सभी घटकों को एक छत के नीचे लाकर संगठन की शक्ति को पहचानना और समाज की सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित करना है।

महाराजा अग्रसेन जी के आदर्शों का उल्लेख करते हुए जिंदल ने कहा कि उन्होंने तलवार और युद्ध के बल पर नहीं, बल्कि नैतिकता, सामाजिक समानता और परोपकार के माध्यम से समाज को दिशा दी। उनसे जुड़ी परंपरा के अनुसार, उनके राज्य में आने वाले जरूरतमंद व्यक्ति को एक ईंट और एक रुपया दिया जाता था, जिससे वह अपना व्यवसाय शुरू कर सके और सम्मानपूर्वक अपने परिवार का पालन-पोषण कर सके। उन्होंने कहा कि यह परंपरा आत्मनिर्भरता, सहयोग और मानवीय संवेदना का संदेश देती है। आज भी समाज को इन्हीं आदर्शों पर आगे बढ़ने की जरूरत है, ताकि जरूरतमंद लोगों की सहायता उनकी गरिमा और आत्मसम्मान को बनाए रखते हुए की जा सके।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को संस्कार और संस्कृति से जोड़ना महासभा की प्राथमिकताओं में शामिल है। वर्तमान समय में फिल्मों, टेलीविजन और बदलते सामाजिक परिवेश के प्रभाव के बीच बच्चों को नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और भारतीय संस्कृति की जानकारी देना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से महासभा इस दिशा में काम कर रही है। उन्होंने शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता को भी महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि केवल बीए या एमए की डिग्री हासिल कर लेना रोजगार की समस्या का समाधान नहीं है। बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान और कौशल में भी निपुण बनाना होगा।

जिंदल ने बताया कि रामनगर रोड पर एक विद्यालय का निर्माण किया जा रहा है। इस संबंध में विद्या भारती के अधिकारियों के साथ भी चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा पद्धति में छठी कक्षा से ही कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है। महासभा भी बच्चों को शिक्षा के साथ रोजगारोन्मुख कौशल प्रदान करने के उद्देश्य से अपने स्तर पर पाठ्यक्रम संचालित करने की दिशा में प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के दौर में पहुंच चुकी है। ऐसे में नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीक से परिचित कराने के साथ-साथ उसे सामाजिक जिम्मेदारियों और सेवा के लिए भी प्रेरित करना जरूरी है।

समाज के जरूरतमंद परिवारों की सहायता के विषय में उन्होंने कहा कि कई लोग आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी जरूरत दूसरों के सामने रखने में संकोच करते हैं। महासभा के अध्यक्ष एमपी गुप्ता और उनकी पूरी टीम इस विषय को गंभीरता से ले रही है। प्रयास है कि जरूरतमंद लोगों की पहचान और सहायता गोपनीय तरीके से की जाए, ताकि उनकी गरिमा बनी रहे और वे सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकें।

प्रेस वार्ता में काशीपुर के चीमा चौराहे का नाम महाराजा अग्रसेन जी के नाम पर रखे जाने की मांग का मुद्दा भी उठा। इस संबंध में पूछे गए सवाल पर जिंदल ने स्पष्ट किया कि यह मांग समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि समाज की एकता की कमी के कारण ऐसी मांगों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में कठिनाई आती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संगठित प्रयासों और संवाद के माध्यम से इस विषय पर आगे बढ़ा जा सकेगा।

आरक्षण और सामान्य वर्ग के युवाओं को सरकारी नौकरियों में अवसर मिलने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि महासभा का तरीका शालीनता के साथ बातचीत करना तथा सरकार और समाज के साथ सहयोग बनाए रखना है। संगठन अपनी भावनाओं और समस्याओं को उचित माध्यमों से सरकार तक पहुंचाने में विश्वास करता है। उन्होंने कहा कि केवल सड़कों पर झंडे लेकर निकलने के बजाय संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से समस्याओं का समाधान तलाशना अधिक उपयोगी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इन विषयों पर गंभीरता से विचार करेगी और आने वाले समय में सकारात्मक निर्णय सामने आएंगे।

शोभायात्रा की जानकारी देते हुए यात्रा के संयोजक प्रियांशु बंसल ने बताया कि यह आयोजन लगातार चौथे वर्ष किया जा रहा है। इस बार जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए नीव करौली बाबा की झांकी भी शामिल की गई है। शोभायात्रा में गीता प्रेस के माध्यम से सनातन साहित्य के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले हनुमान प्रसाद पोद्दार जी की झांकी भी निकाली जाएगी। इसके साथ ही स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले वैश्य समाज के महापुरुष की झांकी के माध्यम से समाज के ऐतिहासिक योगदान को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। शोभायात्रा के सबसे पीछे महाराजा अग्रसेन जी का भव्य रथ रहेगा।

आयोजकों के अनुसार, शोभायात्रा 13 अक्टूबर को शाम पांच बजे मौ किला से प्रारंभ होकर रामलीला मैदान तक पहुंचेगी। मार्ग में वैश्य समाज की विभिन्न संस्थाओं की ओर से शोभायात्रा का स्वागत किया जाएगा। कई स्थानों पर आरती और जलपान की व्यवस्था भी रहेगी। आयोजकों ने समाज के सभी घटकों, संस्थाओं और विशेष रूप से युवाओं से इसमें शामिल होने की अपील की है।

उन्होंने कहा कि महाराजा अग्रसेन जी की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, परोपकार, समानता और सामूहिक प्रयासों में निहित है। यदि वैश्य समाज संगठित होकर शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक सेवा के क्षेत्रों में आगे बढ़े, तो वह न केवल अपनी नई पीढ़ी का भविष्य बेहतर बना सकता है, बल्कि राष्ट्र और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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