@शब्द दूत ब्यूरो (06 जुलाई 2026)
नयी दिल्ली । श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान राशि की गणना में सामने आई कथित अनियमितताओं को लेकर सोमवार को एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी की। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वयं उत्तर प्रदेश शासन से उच्च स्तरीय एसआईटी जांच का अनुरोध किया गया था। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और गिरफ्तारियां भी की गई हैं।
ट्रस्ट ने बताया कि वर्ष 2020 में गठन के बाद छह वर्षों से भी कम समय में श्रीरामलला के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य पूरा किया गया। इस दौरान मुख्य मंदिर और परकोटे में बने मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा, ध्वजारोहण तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान सफलतापूर्वक संपन्न हुए। ट्रस्ट ने निर्माण कार्य में सहयोग देने वाले समाज, अभियंताओं, शिल्पकारों तथा केंद्र एवं राज्य सरकारों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, निधि समर्पण अभियान और कॉर्पस दान के माध्यम से ट्रस्ट को अब तक 3,246 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिनमें से 2,730 करोड़ रुपये निर्माण और पूंजीगत कार्यों पर खर्च किए गए। वहीं, प्रारंभ से लेकर 31 मार्च 2025 तक मंदिर में कुल 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ, जिसमें से 392 करोड़ रुपये संचालन व्यय में खर्च किए गए हैं। ट्रस्ट का कहना है कि शेष राशि बैंक खातों में सुरक्षित है और समय-समय पर वित्तीय जानकारी सार्वजनिक की जाती रही है।
ट्रस्ट ने बताया कि दान राशि की गणना प्रक्रिया में अनियमितता की जानकारी मिलने के बाद प्रारंभिक तथ्य जुटाए गए और उसके बाद राज्य सरकार से निष्पक्ष जांच का अनुरोध किया गया। शासन ने तत्काल एसआईटी गठित कर पूरे मामले की जांच शुरू की ताकि दोषियों की भूमिका स्पष्ट हो सके।
प्रारंभिक एसआईटी रिपोर्ट में छह लोगों के नाम सामने आने के बाद ट्रस्ट ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। ट्रस्ट ने कहा कि जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही एसआईटी से यह भी अपेक्षा की गई है कि वह ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में आवश्यक सुधारों के सुझाव दे, जिससे भविष्य में व्यवस्था और अधिक मजबूत एवं पारदर्शी बन सके।
मामले के बीच ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय तथा एक ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर अपने-अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया है। ट्रस्ट की बैठक में दोनों के त्यागपत्र स्वीकार कर लिए गए। इसके अलावा गोपाल नारायणकोटे का नाम विशिष्ट आमंत्रित सदस्य सूची से हटाने का भी निर्णय लिया गया है। ट्रस्ट ने कहा कि अंतिम जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
ट्रस्ट ने यह भी कहा कि कुछ लोग इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का उपयोग श्रीरामलला मंदिर, श्रीराम जन्मभूमि और व्यापक हिंदू समाज की आस्था को कमजोर करने के लिए कर रहे हैं। ट्रस्ट के अनुसार, आधारहीन आरोपों के माध्यम से भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि सत्य जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
प्रेस विज्ञप्ति में ट्रस्ट ने चढ़ावे के रूप में प्राप्त वस्तुओं का भी उल्लेख किया। ट्रस्ट के अनुसार, अब तक 2,126 वस्तु-भेंटें प्राप्त हुई हैं, जिनका पूरा विवरण रजिस्टर में दर्ज है और उनका स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म द्वारा सत्यापन कराया जाता है। चांदी की वस्तुओं को भारत सरकार की टकसाल में गलवाकर छड़ें बनाई गई हैं, जिनका वजन, शुद्धता और प्रमाणपत्र सुरक्षित रखे गए हैं। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि यदि कोई अपनी भेंट का सत्यापन करना चाहता है तो वह पूर्व निर्धारित समय लेकर अयोध्या पहुंचकर इसकी पुष्टि कर सकता है।

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