@शब्द दूत ब्यूरो (05 जुलाई 2026)
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने अयोध्या पुलिस के जांच अधिकारी (डीएसपी) को पत्र लिखकर उन प्रमुख नेताओं के बयान दर्ज करने की मांग की है, जिन्होंने इस मामले में सार्वजनिक रूप से बड़े आरोप लगाए हैं।
4 जुलाई 2026 को लिखे गए पत्र में आलोक कुमार ने कहा है कि राम जन्मभूमि थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 0090/2026 की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए उन नेताओं से पूछताछ आवश्यक है, जिन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से करोड़ों रुपये के घोटाले और चोरी के आरोप लगाए हैं।
पत्र में जिन नेताओं के नाम शामिल किए गए हैं, उनमें समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, राज्यसभा सांसद संजय सिंह तथा कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हैं।
पत्र के अनुसार, इन नेताओं ने सार्वजनिक रूप से विभिन्न दावे किए हैं। इनमें लगभग 20,000 करोड़ रुपये के घोटाले, 200 करोड़ रुपये से अधिक की चोरी, सोना-चांदी एवं अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के गायब होने जैसे आरोप शामिल हैं। प्रियंका गांधी के कथित बयान का भी उल्लेख करते हुए पत्र में कहा गया है कि उन्होंने सवाल उठाया था कि क्या कुछ कर्मचारी अकेले इतने बड़े स्तर की चोरी कर सकते हैं या इसके पीछे किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका है।
आलोक कुमार ने अपने पत्र में कहा है कि चूंकि इन नेताओं ने सार्वजनिक मंचों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, इसलिए जांच एजेंसी को उनसे यह जानकारी लेनी चाहिए कि उनके आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या है, उन्हें यह जानकारी कहां से मिली और उनके पास इन आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज या अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं।
पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि संबंधित नेता अपने आरोपों के समर्थन में विश्वसनीय सामग्री प्रस्तुत करते हैं तो इससे जांच एजेंसी को सच्चाई तक पहुंचने में मदद मिलेगी। वहीं, यदि जांच में यह पाया जाता है कि आरोप बिना किसी तथ्यात्मक आधार के लगाए गए हैं, तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
इस पत्र के सामने आने के बाद राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। अब निगाहें जांच एजेंसी पर हैं कि वह इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और क्या संबंधित नेताओं को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया जाता है।


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