@शब्द दूत ब्यूरो (24 नवंबर, 2023)
सिलक्यारा सुरंग हादसे में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित निकालना पहली प्राथमिकता तो है लेकिन निर्माणदायी कंपनी की लापरवाही भी अब सामने आ रही है। यदि निर्माण कार्य के दौरान कंपनी द्वारा सुरक्षा की अनदेखी न की गई होती तो आज 41 श्रमिकों की जान के लाले न पड़े होते। केंद्र से लेकर उत्तराखंड सरकार तक की चिंता आज सिर्फ इन श्रमिकों को सकुशल रखने की है।
चारधाम महामार्ग विकास परियोजना में निर्माणाधीन सिलक्यारा सुरंग में एस्केप पैसेज का निर्माण प्रस्तावित था। इस पूरी परियोजना का नाम ही सिलक्यारा बैंड-बड़कोट टनल विद एस्केप पैसेज रखा गया, लेकिन इसके निर्माण की ओर ध्यान नहीं दिया गया। यदि यहां एस्केप पैसेज का निर्माण किया गया होता तो सुरंग के अंदर भूस्खलन के चलते मजदूर नहीं फंसते और बाहर निकल आते।
दरअसल, सुरंगों में किसी भी तरह की आपातकालीन स्थितियों में बचाव के लिए एस्केप पैसेज या टनल का निर्माण किया जाता है। यह मुख्य सुरंग से छोटी होती है। इसका इस्तेमाल केवल आपातकालीन परिस्थितियों में ही होता है। यहां चारधाम महामार्ग परियोजना में निर्माणाधीन राज्य की सबसे लंबी डबल लेन 4.5 किमी लंबी सिलक्यारा से पोलगांव सुरंग में भी एस्केप पैसेज का निर्माण प्रस्तावित था।
एनएचआईडीसीएल की ओर से बनाई जा रही इस सुरंग में इसके निर्माण की ओर ध्यान नहीं दिया गया। सुरंग के बीचोंबीच एक दीवार बनाई जा रही थी, जिसमें हर 500 मीटर पर एक लेन से दूसरी लेन में जाने के लिए रास्ता दिया गया था।
कार्यदायी संस्था एनएचआईडीसीएल के अधिकारी इसे ही एस्केप पैसेज बता रहे थे। उनका कहना है कि यदि एक लेन में कोई दिक्कत होगी, तो दूसरे लेन में आसानी से जाया जा सकेगा।
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