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बड़ी खबर : झांसी से गिरफ्तार हुए उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू, 25 दिन से पुलिस कर रही थी तलाश

@शब्द दूत ब्यूरो (07 नवंबर 2026)

देहरादून। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। करीब 25 दिनों से फरार चल रहे गिरधारी लाल साहू को पुलिस ने उत्तर प्रदेश के झांसी से गिरफ्तार कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

मंत्री रेखा आर्य ने 15 अक्टूबर को देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद से ही पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी देहात जया बलोनी की अध्यक्षता में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई थी।

एसआईटी ने इस मामले में गिरधारी लाल साहू के कई करीबियों से पूछताछ की थी। पुलिस ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों पर दबिश दी। उसकी तलाश में नेपाल भागने की आशंका को देखते हुए संबंधित एजेंसियों से भी संपर्क किया गया था। पुलिस जांच में उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश के बरेली और अन्य जिलों में करीब 50 मुकदमे दर्ज होने की बात भी सामने आई थी। Amar Ujala Hindi News Live +1

इस बीच गिरधारी लाल साहू को बड़ी कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए गैर-जमानती वारंट हासिल किया था। उसने उत्तराखंड हाईकोर्ट में अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त कराने और गिरफ्तारी से राहत देने की मांग की थी, लेकिन 4 नवंबर को हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ ने माना कि शिकायत में प्रथम दृष्टया गंभीर संज्ञेय अपराधों के आरोप हैं और इसे महज वैवाहिक विवाद नहीं माना जा सकता। India News +1

रेखा आर्य की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि गिरधारी लाल साहू ने अपनी पहली शादी और बच्चों की जानकारी छिपाकर विवाह किया। इसके अलावा मारपीट, प्रताड़ना, जातिसूचक टिप्पणी करने और कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए उन्हें कंपनियों के निदेशक पद से हटाने के आरोप भी लगाए गए थे। शिकायत में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए उनकी हत्या की साजिश रचे जाने का आरोप भी शामिल है।

हालांकि, इन सभी आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होना है। गिरधारी लाल साहू की ओर से भी आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखा गया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ऑडियो रिकॉर्डिंग और दस्तावेजों की प्रमाणिकता का परीक्षण इस स्तर पर नहीं किया जा सकता।

झांसी से गिरफ्तारी की खबर इस पूरे प्रकरण में नया मोड़ मानी जा रही है। पुलिस की आधिकारिक पुष्टि और गिरफ्तारी के बाद की कार्रवाई का विवरण सामने आने पर मामले की आगे की स्थिति और स्पष्ट होगी।

 

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