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गर्व की बात:तीरों से काशीपुर की नयी पहचान, केडीएफ के नन्हे तीरंदाजों जीते गोल्ड ब्रांज मैडल, अब नेशनल और ओलिंपिक पर निगाहें, देखिए वीडियो नन्हे तीरंदाजों के हौसले

@शब्द दूत ब्यूरो (23 अगस्त 2026)

काशीपुर। काशीपुर में तीरंदाजी की प्रतिभाओं को तराशने का प्रयास अब रंग लाने लगा है। केडीएफ आर्चरी सेंटर के खिलाड़ियों ने सीबीएसई नॉर्थ जोन और अखिल भारतीय विद्याभारती प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए हैं। खिलाड़ियों के प्रदर्शन से जहां उनके परिवारों में खुशी का माहौल है, वहीं केडीएफ ने अब इन प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।

केडीएफ आर्चरी सेंटर के प्रशिक्षक रिटायर्ड तीरों से काशीपुर की नयी पहचान, केडीएफ सूबेदार हेमचंद हरबोला ने बताया कि सेंटर के खिलाड़ियों ने सीबीएसई नॉर्थ जोन में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए हैं, जबकि अखिल भारतीय विद्याभारती प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने गोल्ड मेडल जीते हैं। सीबीएसई नेशनल के लिए हंस हरबोला और ऐश्वर्या कड़ाकोटी का चयन हुआ है, जबकि रुद्र प्रताप का अखिल भारतीय विद्याभारती प्रतियोगिता के राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन हुआ है।

प्रशिक्षक रिटायर्ड सूबेदार हेमचंद हरबोला का कहना है कि एकेडमी की शुरुआत के समय इन बच्चों को बहुत कम लोग जानते थे, लेकिन आज उनके प्रदर्शन की पहचान पूरे प्रदेश में बन रही है। उनका लक्ष्य आने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों को पदक दिलाना है। जूनियर नेशनल राजस्थान, सीनियर नेशनल मेघालय और अगले वर्ष होने वाले नेशनल गेम्स पर सेंटर का विशेष फोकस रहेगा। इसके बाद खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की तैयारी की जाएगी।

सीबीएसई नॉर्थ जोन में पदक जीतकर राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चयनित ऐश्वर्या कड़ाकोटी की मां ने बताया कि उन्हें शुरुआत में तीरंदाजी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। ऐश्वर्या ने स्वयं इस खेल में रुचि दिखाई और घर के पास प्रशिक्षण केंद्र होने के कारण उसे यहां भेजा गया। धीरे-धीरे परिवार को भी महसूस हुआ कि बेटी में इस खेल को लेकर खास प्रतिभा और रुचि है।

ऐश्वर्या की मां ने कहा कि कोच सूबेदार हेमचंद हरबोला ने उनकी बेटी पर विशेष ध्यान दिया और परिवार को भी पूरा सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि बेटी का राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन होना पूरे परिवार और केडीएफ के लिए गर्व की बात है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय स्तर पर जाने वाले सभी बच्चे शानदार प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल लेकर लौटें और केडीएफ का नाम रोशन करें।

अभिभावकों ने यह भी माना कि तीरंदाजी आसान खेल नहीं है। इसमें धैर्य, एकाग्रता और नियमित अभ्यास के साथ आर्थिक संसाधनों की भी जरूरत होती है। उपकरण और प्रशिक्षण का खर्च अधिक होने के बावजूद परिवार बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पूरा सहयोग कर रहे हैं। अभिभावकों के अनुसार बच्चों में पदक जीतने के बाद आत्मविश्वास भी काफी बढ़ा है। साथ ही बच्चे खेल के साथ अपनी पढ़ाई को भी जारी रख रहे हैं।

केडीएफ अध्यक्ष राजीव घई ने कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धियां केवल संस्था की नहीं, बल्कि पूरे काशीपुर शहर के लिए गर्व की बात हैं। उन्होंने कहा कि काशीपुर की ऐतिहासिक धनुर्विद्या की परंपरा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से केडीएफ ने यह पहल शुरू की है और सपना है कि काशीपुर से फिर कोई ‘अर्जुन’ निकले।

उन्होंने कहा कि हर महीने केडीएफ के बच्चे किसी न किसी प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन कर गोल्ड, सिल्वर और अन्य पदक हासिल कर रहे हैं। कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की टीमों में अपनी जगह बना रहे हैं। उन्होंने इसके लिए खिलाड़ियों के परिवारों और शहरवासियों के प्रोत्साहन को महत्वपूर्ण बताया।

राजीव घई ने बताया कि केडीएफ की ओर से काशीपुर में एक पूर्ण आर्चरी अकादमी शुरू करने की तैयारी की जा रही है।  इसके लिए जगह और प्रशासनिक सहयोग की आवश्यकता है। पदाधिकारी ने कहा कि अकादमी स्थापित करना एक बड़ा सपना है, लेकिन सपनों को साकार करने के लिए प्रयास करना जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में शहर के लोग, परिवार और प्रशासन इस प्रयास में सहयोग करेंगे।

उन्होंने कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य खिलाड़ियों को केवल राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें ओलंपिक तक ले जाना है। उनके अनुसार जिस दिन काशीपुर का कोई बच्चा तीरंदाजी में ओलंपिक तक पहुंचेगा, वह शहर के लिए बेहद गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक दिन होगा।

प्रशासन से अपेक्षित सहयोग को लेकर उन्होंने कहा कि संभव है कि केडीएफ की गतिविधियां अभी प्रशासन की नजरों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हों। उन्होंने कहा कि जब इन बच्चों के राष्ट्रीय स्तर के पदक और उपलब्धियां प्रशासन तक पहुंचेंगी तो उम्मीद है कि जिलाधिकारी और मंडल स्तर के अधिकारी भी इन खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि पूरे ऊधमसिंह नगर और कुमाऊं क्षेत्र में तीरंदाजी को आगे बढ़ाने की दिशा में केडीएफ ने पहल की है। संस्था चाहती है कि खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलें, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को बड़े शहरों की ओर जाने की मजबूरी न हो।

केडीएफ आर्चरी सेंटर के खिलाड़ियों की लगातार सामने आ रही उपलब्धियों ने काशीपुर में तीरंदाजी के लिए नई उम्मीद जगाई है। अब सीबीएसई नेशनल और अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में चयनित खिलाड़ियों पर शहर की निगाहें हैं। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ-साथ काशीपुर से एक ऐसे आर्चरी सेंटर के निर्माण की उम्मीद भी बढ़ी है, जहां से भविष्य में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक स्तर के तीरंदाज तैयार हो सकें।

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