@शब्द दूत ब्यूरो (07 जुलाई 2026)
हरिद्वार/अयोध्या। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और गबन के आरोपों के बाद देशभर के प्रमुख मंदिरों में व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में हरिद्वार स्थित मांसा देवी मंदिर प्रबंधन ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मंदिर के पुजारियों और कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाले वस्त्र पहनना अनिवार्य करने का फैसला किया है। साथ ही चढ़ावे और मंदिर की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए एक विशेष समिति का भी गठन किया गया है।
मंदिर समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की शंका या विवाद की स्थिति से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है। बिना जेब वाले वस्त्र पहनने से नकदी या अन्य कीमती सामान को व्यक्तिगत रूप से रखने की संभावना समाप्त होगी, जिससे चढ़ावे की व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।
समिति के अनुसार मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले से अधिक मजबूत किया जाएगा। इसके लिए अलग-अलग अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां तय की गई हैं तथा निगरानी की प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा।
हाल के दिनों में अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर सामने आए विवाद ने पूरे देश में चर्चा छेड़ दी है। मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी, जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अन्य मंदिर प्रबंधन भी अपनी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं। इसी वजह से कई धार्मिक संस्थान सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नए नियम लागू कर रहे हैं।
धार्मिक जानकारों का मानना है कि मंदिरों में श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में चढ़ावे की निगरानी, कर्मचारियों के लिए स्पष्ट आचार संहिता और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था जैसे कदम भविष्य में विवादों को रोकने में सहायक साबित हो सकते हैं।
मांसा देवी मंदिर समिति ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय किसी व्यक्ति विशेष को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि मंदिर की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की गरिमा बनाए रखने के लिए भविष्य में भी आवश्यक सुधार लागू किए जाते रहेंगे।
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