@शब्द दूत ब्यूरो (05 जुलाई 2026)
नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश के घरों में वर्षों से सुरक्षित रखे सोने को आर्थिक गतिविधियों में लाने के लिए नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) लाने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस नई योजना के तहत बैंकों के साथ-साथ देशभर के ज्वेलर्स को भी ‘कलेक्शन पार्टनर’ बनाया जा सकता है, जिससे आम लोगों के लिए सोना जमा कराना पहले की तुलना में अधिक आसान होगा।
अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास करीब 25,000 टन सोना मौजूद है। यदि इसका केवल 5 प्रतिशत यानी लगभग 1,000 टन सोना भी बाजार में आ जाता है, तो देश का सोना आयात बिल करीब ₹8.5 लाख करोड़ तक घट सकता है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और चालू खाता घाटा कम करने में भी मदद मिलेगी।
बुलियन बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल रहती है तो भारत में करीब दो वर्षों तक सोने के आयात की आवश्यकता लगभग समाप्त हो सकती है। इससे डॉलर की मांग कम होगी, रुपये को मजबूती मिलेगी और घरेलू अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचेगा।
सरकार ने वर्ष 2015 में भी गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम शुरू की थी, जिसके तहत लोग अपना सोना बैंकों में जमा कर 2.25 से 2.5 प्रतिशत तक ब्याज प्राप्त कर सकते थे। हालांकि करीब दस वर्षों में इस योजना के तहत केवल 38 टन सोना ही जमा हो पाया।
विशेषज्ञों के अनुसार, योजना के अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के पीछे प्रमुख कारण लोगों का पुश्तैनी गहनों से भावनात्मक लगाव, गहनों को पिघलाने की अनिच्छा तथा आयकर जांच की आशंका रही। इसके अलावा सरकार पर ब्याज और सोने की बढ़ती कीमतों का वित्तीय बोझ भी बढ़ा।
नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम में ज्वेलर्स को कलेक्शन पार्टनर बनाकर प्रक्रिया को सरल बनाया जा सकता है। इससे लोग अपने नजदीकी विश्वसनीय ज्वेलर के माध्यम से सोना जमा करा सकेंगे। सरकार का उद्देश्य निष्क्रिय पड़े सोने को आर्थिक प्रणाली में शामिल कर आयात पर निर्भरता कम करना और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है।
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