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काशीपुर :महाभारतकालीन द्रोणासागर की बदहाली पर उठे सवाल, लोगों ने बताई गंदगी, सुरक्षा और अश्लील गतिविधियों की समस्या;कौन सुधारेगा हालात, भाजपा नेता चंडोक ने दी जानकारी, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (03 जुलाई 2026)

काशीपुर। महाभारतकालीन ऐतिहासिक एवं पौराणिक तीर्थ स्थल द्रोणासागर की वर्तमान स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। सुबह-शाम सैर करने आने वाले नागरिकों का कहना है कि ऐतिहासिक महत्व रखने वाले इस स्थल पर साफ-सफाई, सुरक्षा और रखरखाव की स्थिति संतोषजनक नहीं है। वहीं कुछ लोगों ने दोपहर के समय यहां कथित रूप से अशोभनीय गतिविधियां होने का भी आरोप लगाया, जिससे परिवारों और महिलाओं को असहजता का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय महिलाओं ने बताया कि सरकार की ओर से कुछ सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन गंदगी फैलाने के लिए आम जनता भी समान रूप से जिम्मेदार है। उनका कहना था कि कूड़ेदान होने के बावजूद लोग प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट और अन्य कचरा परिसर में ही फेंक देते हैं। लोगों ने परिसर में नियमित सफाई, तालाब की देखभाल और कूड़ा फैलाने वालों पर जुर्माना लगाने की मांग की।

कई बुजुर्गों ने बताया कि वर्षों पहले द्रोणासागर वास्तव में पानी से भरी झील हुआ करता था। यहां कछुए और कमल के फूल दिखाई देते थे, लेकिन अब अधिकांश हिस्सा घास से ढका हुआ है और तालाब का स्वरूप लगभग समाप्त हो चुका है। उनका कहना है कि यदि जल संरक्षण और सफाई पर ध्यान दिया जाए तो यह स्थल फिर से अपनी पुरानी पहचान हासिल कर सकता है।

कुछ महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि दोपहर के समय यहां प्रेमी जोड़ों की अशोभनीय गतिविधियां होती हैं, जिससे परिवारों के साथ आने वाले लोगों को असहजता महसूस होती है। उनका कहना है कि परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद प्रभावी निगरानी नहीं होती। उन्होंने पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।

द्रोणासागर में नियमित रूप से व्यायाम और मॉर्निंग वॉक करने आने वाले लोगों ने टूटी सड़कों, बच्चों के झूलों की खराब स्थिति और साफ-सफाई की कमी को भी प्रमुख समस्या बताया। उनका कहना है कि बड़े लोग बच्चों के झूलों का उपयोग करते हैं, जिससे वे जल्दी खराब हो जाते हैं और बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है।

इस दौरान भाजपा प्रदेश प्रवक्ता  गुरविंदर सिंह चंडोक ने कहा कि द्रोणासागर काशीपुर की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग मॉर्निंग वॉक और इवनिंग वॉक के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि पहले चरण में पर्यटन विभाग द्वारा विकास कार्य कराए गए हैं, जबकि लगभग 4.95 करोड़ रुपये की लागत से दूसरे चरण की योजना तैयार की गई है।

उन्होंने जानकारी दी कि 7 जुलाई से द्रोणासागर की साफ-सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी नगर निगम काशीपुर को सौंपी जाएगी, जिससे यहां की व्यवस्थाओं में सुधार होने की उम्मीद है।

किले के लंबे समय से बंद होने के सवाल पर चंडोक ने कहा कि कोरोना काल के बाद क्षेत्र में तेंदुओं की मौजूदगी के कारण सुरक्षा की दृष्टि से किले को आम लोगों के लिए बंद रखा गया है। उनका कहना था कि जनसुरक्षा सर्वोपरि है और वन विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित घोषित होगा, किले को दोबारा खोले जाने पर विचार किया जाएगा।

ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण द्रोणासागर को लेकर स्थानीय लोगों की अपेक्षा है कि सरकार और प्रशासन शीघ्र प्रभावी कदम उठाकर इस धरोहर को उसकी गरिमा के अनुरूप विकसित करें, ताकि यह स्थल देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सके।

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