@शब्द दूत ब्यूरो (25 मई, 2022)
जब कर्नल कोठियाल भाजपा में शामिल हो रहे थे, तो कइयों की जुबान पर यह सवाल तैर रहा था कि आखिर गंगोत्री विधानसभा सीट से अपनी जमानत तक जब्त करा बैठे कर्नल अजय कोठियाल को भाजपा में लाने के क्या सियासी मायने हो सकते हैं। आखिर भाजपा उनको पार्टी में लाकर करेगी क्या। लेकिन भाजपा के चुनावी रणनीतिकारों ने कर्नल कोठियाल जैसे चेहरों में भी उपयोगिता ढूंढ ही ली। बताया जा रहा है कि कर्नल कोठियाल के इस ‘दिलबदल’ के पीछे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय का भी बहुत बड़ा हाथ है।
दरअसल, उत्तराखंड के पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ये भी तय है कि हिमाचल में आम आदमी पार्टी की काट के लिए कर्नल को मोहरा बनाया जाएगा। लिहाजा जैसे ही कर्नल कोठियाल ने भाजपा आलाकमान के सामने अपनी दिली ख्वाहिश रखी उन्हें पार्टी में तुरंत शामिल कर लिया गया।
हिमाचल में आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ने के लिए कमर कस चुकी है। हिमाचल पर पड़ोसी राज्य पंजाब का ठीक वैसा ही प्रभाव है, जैसा उत्तराखंड पर उत्तरप्रदेश का। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। अपनी सरकार के दम पर आप हिमाचल में चुनावी माहौल को अपने हक में करने की तैयारी में है, लेकिन वहां सत्तारूढ़ भाजपा कर्नल अजय कोठियाल को प्रचार मैदान में उतारकर आप के चुनावी हमलों का जवाब दे सकती है।
वहीं, कोठियाल अब आम आदमी पार्टी से जुड़ने को अपनी सबसे बड़ी भूल बता रहे हैं। जाहिर है कि यही बात जब वह हिमाचल के मतदाताओं के बीच दोहराएंगे तो इसका जवाब देना आप के लिए आसान नहीं होगा। दूसरा उत्तराखंड की तरह हिमाचल भी सैनिक बहुल माना जाता है। दोनों ही लिहाज से कर्नल कोठियाल भाजपा के लिए उपयोगी दिखाई देते हैं।
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